तेलंगाना: करीमनगर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्ग Father की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बुजुर्ग दंपति अपने ही घर के सामने विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर है। दंपति का आरोप है कि उनका बेटा उन्हें घर खाली करके कहीं और चले जाने के लिए दबाव डाल रहा है।
मामला करीमनगर के कोथिरामपुर इलाके का बताया जा रहा है। बुजुर्ग दंपति का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत और कमाई से यह घर बनवाया था, लेकिन बाद में बेटे के नाम पर संपत्ति हस्तांतरित कर दी। अब वही बेटा कथित तौर पर उन्हें घर से बाहर जाने के लिए कह रहा है।
बुजुर्ग पिता का कहना है कि उन्हें बुढ़ापे में किसी बड़ी संपत्ति या धन-दौलत की जरूरत नहीं है। वे सिर्फ अपना घर चाहते हैं, जहां वे सुरक्षित तरीके से रह सकें।

जम्मीकुंटा मंडल के रहने वाले हैं लक्ष्मण
जानकारी के अनुसार, इस मामले में बुजुर्ग की पहचान देवुलपल्ली लक्ष्मण के रूप में हुई है। वह करीमनगर जिले के जम्मीकुंटा मंडल के वाविलाला गांव के रहने वाले हैं।
लक्ष्मण वर्ष 2010 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। बेटे का नाम रविकुमार बताया गया है।
सेवानिवृत्ति के बाद लक्ष्मण और उनकी पत्नी अपनी जिंदगी गुजार रहे थे। बताया गया कि कोथिरामपुर में मौजूद मकान से मिलने वाला किराया उनके लिए आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद चल रहा है। इसी विवाद के कारण अब बुजुर्ग दंपति को अपने ही घर के सामने प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
2002 में बनवाया था मकान
बुजुर्ग दंपति के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2002 में कोथिरामपुर में इस मकान का निर्माण कराया था। उस समय यह घर उनकी मेहनत और आर्थिक संसाधनों से तैयार हुआ था।
लक्ष्मण ने बताया कि वर्ष 2010 में उन्होंने यह मकान अपने बेटे रविकुमार के नाम पर ट्रांसफर कर दिया था। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा भविष्य में उनकी देखभाल करेगा और परिवार के बीच संबंध अच्छे बने रहेंगे।
हालांकि, बुजुर्ग दंपति का आरोप है कि समय बीतने के साथ परिस्थितियां बदल गईं। उनका कहना है कि वर्ष 2023 से उनका बेटा लगातार घर खाली करने के लिए दबाव बना रहा है।
बेटे पर घर खाली करने का दबाव बनाने का आरोप
लक्ष्मण और उनकी पत्नी जयलक्ष्मी ने आरोप लगाया कि उनका बेटा वर्ष 2023 से उन्हें घर छोड़ने के लिए कह रहा है। बुजुर्ग दंपति का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए अपना घर छोड़कर किसी दूसरी जगह जाना बेहद मुश्किल है।
उनका कहना है कि घर छोड़ने के बाद उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होगी। इसी वजह से वे प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
बुजुर्ग पिता ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उन्हें किसी बड़ी चीज की मांग नहीं है। वे केवल चाहते हैं कि उन्हें उनका घर वापस मिल जाए और बुढ़ापे में उन्हें सुरक्षित जीवन जीने दिया जाए।
बेटा हैदराबाद में एयरोस्पेस इंजीनियर
बुजुर्ग दंपति के अनुसार, उनका बेटा रविकुमार हैदराबाद में एयरोस्पेस इंजीनियर के तौर पर काम करता है। उन्होंने दावा किया कि बेटे की मासिक आय करीब 8 लाख रुपये है।
इसी बात को लेकर बुजुर्ग दंपति की पीड़ा और बढ़ जाती है। उनका कहना है कि बेटा आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद उन्हें अपने ही घर में रहने देने के लिए तैयार नहीं है।
हालांकि, बेटे की नौकरी और आय से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ये बातें बुजुर्ग दंपति की ओर से लगाए गए आरोपों के रूप में सामने आई हैं।
किराए से होने वाली आय है जीविका का सहारा
लक्ष्मण और उनकी पत्नी ने बताया कि जिस मकान को लेकर विवाद चल रहा है, उससे मिलने वाला किराया उनकी मौजूदा जिंदगी का महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है।
सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्ग दंपति के लिए घर से मिलने वाली किराए की रकम रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में मदद करती है। उनका कहना है कि अगर उन्हें घर से बाहर कर दिया गया तो उनकी आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है।
दंपति ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी स्थिति को देखते हुए उचित कार्रवाई की जाए और उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
पत्नी जयलक्ष्मी हृदय रोग से पीड़ित
बुजुर्ग लक्ष्मण ने बताया कि उनकी पत्नी जयलक्ष्मी हृदय रोग से पीड़ित हैं। ऐसे में लगातार तनाव और घर से बेदखली का डर उनके लिए परेशानी को और बढ़ा रहा है।
दंपति का कहना है कि इस उम्र में उन्हें मानसिक शांति और सुरक्षित रहने की जरूरत है। इसके बजाय वे अपने ही घर के सामने विरोध करने के लिए मजबूर हैं।
लक्ष्मण ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अपने बेटे से किसी बड़ी संपत्ति या आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। उनकी बस यही इच्छा है कि उन्हें रहने के लिए उनका घर मिल जाए।
संपत्ति ट्रांसफर रद्द करने की मांग
बुजुर्ग दंपति ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा है कि वर्ष 2010 में बेटे के नाम की गई संपत्ति के हस्तांतरण की जांच की जाए।
उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि कानूनी रूप से संभव हो तो संपत्ति हस्तांतरण को रद्द किया जाए और उन्हें उनके घर में सुरक्षित रहने का अधिकार दिया जाए।
साथ ही उन्होंने प्रशासन से बेटे के साथ चल रहे विवाद का समाधान कराने की भी अपील की है।
बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल
यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
देश में बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण और उनकी सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण परिस्थितियों की जांच कर यह तय करते हैं कि बुजुर्गों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
इस मामले में भी बुजुर्ग दंपति ने अधिकारियों से इसी तरह की मदद की उम्मीद जताई है।
घर के सामने प्रदर्शन बना चर्चा का विषय
अपने ही घर के सामने बुजुर्ग दंपति के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर और मामला सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई।
लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिन माता-पिता ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए पूरी जिंदगी मेहनत की, उन्हें बुढ़ापे में अपने ही घर को लेकर संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
बुजुर्ग दंपति की मांग फिलहाल बेहद सीधी है—उन्हें सुरक्षित तरीके से अपने घर में रहने दिया जाए और संपत्ति विवाद का समाधान किया जाए।
प्रशासन ने शुरू की मामले की जांच
मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारी बुजुर्ग दंपति द्वारा लगाए गए आरोपों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि मकान का स्वामित्व वर्तमान में किसके नाम है, वर्ष 2010 में संपत्ति का हस्तांतरण किन परिस्थितियों में हुआ था और बुजुर्ग दंपति के वर्तमान अधिकार क्या हैं।
इसके साथ ही बेटे और अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष भी लिया जा सकता है, ताकि पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बुजुर्ग दंपति को न्याय की उम्मीद
लक्ष्मण और जयलक्ष्मी का कहना है कि उन्होंने जीवनभर मेहनत करके अपना घर बनाया और अब वे जीवन के अंतिम पड़ाव में उसी घर में शांति से रहना चाहते हैं।
लक्ष्मण ने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें उनका घर चाहिए। उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए नई जगह जाकर जिंदगी शुरू करना संभव नहीं है।
फिलहाल उनकी नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।
संपत्ति विवाद का समाधान होना बाकी
करीमनगर के कोथिरामपुर में सामने आया यह मामला फिलहाल जांच के दौर में है। बुजुर्ग दंपति ने बेटे पर घर खाली करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है, जबकि मामले की पूरी कानूनी स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन द्वारा मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद अधिकारियों की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है और बुजुर्ग दंपति को अपने घर को लेकर किस तरह की राहत मिलती है।




















