जमशेदपुर। शहर में बढ़ती यातायात समस्याओं, सड़क दुर्घटनाओं और जाम की स्थिति को लेकर भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन, जिला पूर्वी सिंहभूम ने जनहित में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने रखे हैं। एसोसिएशन ने कहा है कि जमशेदपुर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल वाहन चालकों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रशासन, यातायात पुलिस, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों, युवाओं, व्यवसायियों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों को भी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

एसोसिएशन ने मीडिया से भी अपील की है कि किसी दुर्घटना या यातायात संबंधी घटना की खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी तरह जांच की जाए और किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने के बजाय घटना के सभी पहलुओं को सामने रखा जाए।

स्कूल वाहनों पर नियमों के पालन की जरूरत

एसोसिएशन ने कहा कि यदि किसी स्कूल वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है अथवा सुरक्षा एवं यातायात नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

एसोसिएशन के अनुसार स्कूल वाहनों की तरह नो-एंट्री के दौरान शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों पर भी नियमों के अनुरूप कार्रवाई जरूरी है।

अतिक्रमण और गलत पार्किंग को बताया बड़ी चुनौती

एसोसिएशन ने शहर में सड़क किनारे और फुटपाथ पर होने वाले अतिक्रमण को भी यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बताया। संगठन का कहना है कि कई स्थानों पर दुकान, ठेले और अस्थायी प्रतिष्ठानों के कारण सड़क एवं फुटपाथ की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है। इससे वाहनों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी होती है और जाम की स्थिति बनती है।

संगठन ने प्रशासन से सभी प्रकार के अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच कर यातायात के लिए आवश्यक सड़क और फुटपाथ को मुक्त कराने की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की है।

भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग पर विचार की मांग

जमशेदपुर को औद्योगिक शहर बताते हुए एसोसिएशन ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण शहर में बड़ी संख्या में भारी वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग, फ्लाईओवर, ब्रिज अथवा निर्धारित औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की संभावनाओं पर संबंधित विभागों और औद्योगिक प्रबंधन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

संगठन का कहना है कि इससे घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में भारी वाहनों के अनावश्यक आवागमन को कम करने में मदद मिल सकती है।

बस, ऑटो और भारी वाहनों की पार्किंग पर निगरानी जरूरी

एसोसिएशन ने बस स्टैंड एवं सार्वजनिक परिवहन क्षेत्रों से निकलने वाली बसों के सड़क पर खड़े रहने, सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग तथा प्रमुख चौक-चौराहों पर ऑटो और अन्य तीन-पहिया वाहनों के अनियमित ठहराव को भी यातायात प्रभावित करने वाला कारण बताया।

साकची गोलचक्कर समेत शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर नियमित निगरानी और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की मांग की गई है।

अभिभावकों से भी यातायात नियमों के पालन की अपील

एसोसिएशन ने स्कूल समय के दौरान अभिभावकों द्वारा दोपहिया वाहनों पर बच्चों को असुरक्षित तरीके से ले जाने के मामलों पर भी चिंता जताई। संगठन के अनुसार कुछ मामलों में एक दोपहिया वाहन पर तीन लोग सवार दिखाई देते हैं और बच्चों के बैग को वाहन के हैंडल आदि पर लटकाया जाता है, जिससे सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

संगठन ने कम उम्र के बच्चों को दोपहिया वाहन चलाने की अनुमति देने से बचने और बच्चों की सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।

तेज रफ्तार और स्टंट पर सख्ती की मांग

शहर की सड़कों पर तेज रफ्तार में बाइक और स्कूटर चलाने तथा खतरनाक स्टंट करने के मामलों पर भी एसोसिएशन ने चिंता जताई। संगठन ने ऐसे मामलों में यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

एसोसिएशन का कहना है कि सड़क पर किसी एक व्यक्ति की लापरवाही से दूसरे निर्दोष लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

दूसरे जिलों और राज्यों के वाहनों की जांच की मांग

एसोसिएशन ने शहर में चलने वाले दूसरे जिलों एवं राज्यों के वाहनों की भी नियमानुसार जांच की मांग की। संगठन के अनुसार वाहनों के पंजीकरण, फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की समय-समय पर जांच की जानी चाहिए।

इसके अलावा वाहनों में नियमों के विपरीत काले शीशे, पर्दे अथवा अनुचित पहचान चिह्नों के इस्तेमाल पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

पद या राजनीतिक पहचान से नियमों में छूट नहीं

एसोसिएशन ने कहा कि किसी वाहन पर राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, सरकारी विभाग अथवा किसी पद से संबंधित पहचान लगी होने मात्र से उसे यातायात नियमों से छूट नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित पहचान के वैध उपयोग की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए।

राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील

भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने जिले के सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से प्रशासन का सहयोग करने तथा अपने कार्यकर्ताओं को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने की अपील की है।

संगठन ने कहा कि सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

मीडिया से तथ्यों की जांच के बाद खबर प्रकाशित करने का आग्रह

एसोसिएशन ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से विशेष रूप से आग्रह किया कि सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान केवल किसी एक वाहन या वर्ग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय घटना के सभी संभावित कारणों की पड़ताल की जाए।

संगठन के अनुसार दुर्घटना के पीछे अतिक्रमण, गलत पार्किंग, भारी वाहनों का आवागमन, स्कूल वाहन, दोपहिया वाहन, तेज रफ्तार या अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए तथ्यों की जांच के बाद संतुलित रिपोर्टिंग आवश्यक है।

एसोसिएशन ने कहा कि जमशेदपुर की यातायात व्यवस्था में सुधार सामूहिक प्रयास से ही संभव है। प्रशासन और यातायात पुलिस के साथ औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्कूल प्रबंधन, वाहन चालकों, अभिभावकों, युवाओं, राजनीतिक दलों, व्यवसायियों और आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।