चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को बेहतर Health सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न प्रखंडों में विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को उन ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, जहां अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों के लिए कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन विशेष स्वास्थ्य शिविरों में कुल 421 लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के बाद चिकित्सकों ने जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया और आवश्यकतानुसार निःशुल्क आयुष दवाओं का वितरण भी किया गया।
इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना और विशेष रूप से वृद्धजनों को उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समय पर चिकित्सकीय सलाह एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना रहा।

दूरस्थ क्षेत्रों में घर के करीब पहुंची स्वास्थ्य सेवा
ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचना कई बार कठिन हो जाता है। दूरी, आवागमन की समस्या और उम्र संबंधी परेशानियों के कारण कई बुजुर्ग नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष विभाग की ओर से गांव स्तर पर ही विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य जांच की।
गांव के समीप स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होने से बुजुर्गों सहित अन्य ग्रामीणों को अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक जाने के लिए अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। स्थानीय स्तर पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श मिलने से ग्रामीणों को काफी सुविधा मिली।
इन स्थानों पर लगाए गए विशेष आयुष शिविर
जिले के अलग-अलग प्रखंडों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। ये शिविर गोइलकेरा, कुमारडुंगी, झींकपानी के चांदीपी, गुदड़ी के डीयू स्कूल, नोवामुंडी के जामदा बस्ती तथा मंझारी के रोलाडीह में आयोजित किए गए।
इन स्थानों पर आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। बुजुर्गों के अलावा अन्य ग्रामीणों ने भी स्वास्थ्य जांच कराई और चिकित्सकों से अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर परामर्श प्राप्त किया।
आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से उपलब्ध कराई गई सेवाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा।
चिकित्सकों ने की Health जांच और दिया परामर्श
विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों में चिकित्सकों की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। शिविरों में डॉ. धर्म राज सिंह, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अनीश कुमार, डॉ. यशवंती कुमारी, डॉ. श्रवन कुमार यादव, डॉ. दीपक कुमार लायक, डॉ. कविता मैती, डॉ. राधिका कुमारी, डॉ. टिम्मा रानी हेम्ब्रम, डॉ. अनीरूद्ध गोपेश्वर एवं डॉ. प्रदीप गुड़िया ने लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच की।
चिकित्सकों ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लेते हुए उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जांच के उपरांत आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को आयुष चिकित्सा एवं निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सकों ने विशेष रूप से बुजुर्गों की उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीने की दी सलाह
स्वास्थ्य शिविरों के दौरान केवल जांच और दवा वितरण तक ही सेवाओं को सीमित नहीं रखा गया, बल्कि ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी जागरूक किया गया।
चिकित्सकों ने बुजुर्गों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। इसलिए भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करना जरूरी है।
इसके साथ ही ग्रामीणों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त जल का सेवन आवश्यक है। ग्रामीणों को साफ-सफाई पर ध्यान देने तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने के प्रति भी जागरूक किया गया।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर जोर
शिविर में मौजूद चिकित्सकों ने ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी या असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेष रूप से बुजुर्गों में यदि लगातार कमजोरी, दर्द, चक्कर, नींद में परेशानी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई दें तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
चिकित्सकों ने ग्रामीणों से अपील की कि बीमारी बढ़ने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही स्वास्थ्यकर्मी या चिकित्सक से संपर्क करें।
योग और प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ रहने का संदेश
विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों में योग और प्राणायाम को भी स्वास्थ्य जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। योग सत्रों के दौरान ग्रामीणों को सरल एवं सहज योगासन तथा प्राणायाम का अभ्यास कराया गया।
ग्रामीणों को बताया गया कि नियमित योग और शारीरिक गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही शारीरिक गतिविधियों का चयन करना चाहिए।
बुजुर्गों को उनकी क्षमता के अनुरूप हल्की शारीरिक गतिविधियां जारी रखने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
Health दिनचर्या और स्वच्छता के प्रति किया जागरूक
स्वास्थ्यकर्मियों ने ग्रामीणों को स्वच्छता बनाए रखने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उन्होंने व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ घर और आसपास के वातावरण को साफ रखने के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
ग्रामीणों को पर्याप्त आराम करने, समय पर भोजन करने और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही किसी भी बीमारी के लक्षण को नजरअंदाज न करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।
ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर मिल रहा स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
आयुष विभाग की इस पहल से पश्चिमी सिंहभूम जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने में मदद मिली है। विशेष रूप से उन गांवों में रहने वाले बुजुर्गों को इसका लाभ मिला, जहां स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में दूरी और आवागमन की समस्या सामने आती है।
गांव के समीप ही स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और निःशुल्क दवा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सका।
421 लाभार्थियों की जांच, स्वास्थ्य जागरूकता को भी मिला बढ़ावा
विभिन्न प्रखंडों में आयोजित विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों में कुल 421 लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसके साथ ही ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, योग, प्राणायाम, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक किया गया।
शिविरों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए केवल बीमारी का उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम, स्वच्छता और सक्रिय जीवनशैली भी जरूरी है।
दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की पहल
पश्चिमी सिंहभूम जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत जिले में दूरस्थ गांवों तक Health सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऐसे में गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में उपयोगी पहल है।
आयुष विभाग की ओर से आयोजित इन शिविरों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दिया। विशेष रूप से वृद्धजनों को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और लोगों को समय पर चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने में सहायता मिली।




















