जमुई: बिहार के जमुई जिले में एक निजी आवासीय स्कूल से गुरु-शिष्य रामकृष्ण आवासीय स्कूल एवं रिचूलक प्ले स्कूल के निदेशक पर एक Student ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का आरोप है कि स्कूल में अनुशासन के नाम पर उसे निदेशक के कार्यालय में बुलाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार किया गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद छात्रा के परिजन और स्थानीय लोग स्कूल परिसर में पहुंच गए। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सहपाठी से बातचीत को लेकर छात्रा को बुलाया गया
पीड़िता और उसके परिजनों की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, छात्रा अपने एक सहपाठी से बातचीत कर रही थी। इसी बात को लेकर स्कूल निदेशक ने कथित तौर पर छात्रा को अनुशासन का हवाला देते हुए अपने कार्यालय में बुलाया।

छात्रा का आरोप है कि कार्यालय में पहुंचने के बाद निदेशक ने उससे निजी और आपत्तिजनक विषयों को लेकर बातचीत की। शिकायत में यौन संबंध और गर्भधारण जैसे विषयों पर बातचीत किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान निदेशक ने उसकी इच्छा के विरुद्ध अनुचित तरीके से व्यवहार किया। छात्रा के परिजनों ने घटना को गंभीर बताते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों को मिली जानकारी तो स्कूल पहुंचे
छात्रा के साथ कथित घटना की जानकारी मिलने के बाद उसके परिजन तुरंत स्कूल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि जब वे स्कूल पहुंचे तो उन्हें शुरुआत में छात्रा से मिलने और उससे बातचीत करने की अनुमति नहीं दी गई।
परिजनों के मुताबिक, उन्होंने स्कूल प्रबंधन से मामले को लेकर जानकारी मांगी, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इसके बाद स्कूल परिसर में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।
परिजनों ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
हॉस्टल के मुख्य गेट पर ताला लगाने का आरोप
मामले में छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल के मुख्य गेट पर ताला लगाए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब वे अपनी बेटी से मिलने के लिए स्कूल पहुंचे तो उन्हें हॉस्टल के अंदर जाने से रोका गया।
परिजनों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मौके पर पुलिस पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। इसके बाद छात्रा को परिजनों से मिलने का अवसर मिला और उसने कथित घटना के बारे में उन्हें जानकारी दी।
हॉस्टल गेट पर ताला क्यों लगाया गया था और उस समय वहां की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसकी भी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रा के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल और हॉस्टल परिसर में कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
हालांकि, आरोप है कि निदेशक के कार्यालय के जिस केबिन में छात्रा को बुलाया गया था, वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इसी वजह से परिजनों ने स्कूल प्रबंधन से कैमरों की व्यवस्था और रिकॉर्डिंग को लेकर सवाल पूछे हैं।
जांच के दौरान पुलिस यह भी देख सकती है कि स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना से पहले और बाद की क्या गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं। यदि कोई फुटेज उपलब्ध है तो वह मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।
पहले से व्यवहार को लेकर सवाल उठाने का दावा
पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया है कि निदेशक के व्यवहार को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच एजेंसी के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या आरोपी के खिलाफ पहले कभी किसी छात्र, अभिभावक या स्कूल कर्मचारी ने शिकायत की थी। यदि ऐसी कोई शिकायत या रिकॉर्ड मौजूद है तो पुलिस उसे भी जांच का हिस्सा बना सकती है।
हंगामे के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम स्कूल परिसर में पहुंची। उस समय स्कूल के बाहर और परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पुलिस ने लोगों को शांत कराया और मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।
पुलिस ने आरोपी स्कूल निदेशक आशीष सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले जाने की कार्रवाई की। इसके बाद पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, छात्रा के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
छात्रा के बयान को माना जाएगा महत्वपूर्ण
इस मामले में पीड़ित छात्रा का बयान जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस छात्रा और उसके परिजनों से घटना से संबंधित जानकारी ले रही है।
जांच के दौरान स्कूल के कर्मचारियों, हॉस्टल से जुड़े लोगों और घटना के समय परिसर में मौजूद अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा स्कूल में उपलब्ध दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
मामला छात्रा से जुड़ा होने के कारण पुलिस के सामने उसकी पहचान और गरिमा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
SP और SDPO ने कही जांच की बात
जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल और SDPO दीप्ति मोनाली के अनुसार, पीड़ित पक्ष की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सभी पहलुओं की जांच करने की बात कही है।
स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में केवल आरोपी निदेशक की भूमिका ही नहीं, बल्कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए, इसकी भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
परिजनों द्वारा लगाए गए हॉस्टल गेट बंद करने और छात्रा से मिलने से रोकने जैसे आरोपों की भी पुलिस जांच कर सकती है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो इसके पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
वहीं, स्कूल में छात्राओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों और उनकी वास्तविक स्थिति की भी समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। आरोपी पर लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
पुलिस अब छात्रा के बयान, परिजनों की शिकायत, सीसीटीवी फुटेज, स्कूल के रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
यह घटना एक बार फिर स्कूलों और आवासीय संस्थानों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो।
अब सबकी नजर पुलिस की जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।




















