भोपाल: मध्य प्रदेश Bhopal में संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एसटीएफ की जांच में ऐसे मामलों का पता चला है, जिनमें कथित तौर पर फर्जी पते और जाली दस्तावेजों के सहारे भारतीय पासपोर्ट हासिल किये गये। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क में विदेशी नागरिकों के शामिल होने की आशंका है और संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच के दायरे में फिलहाल करीब 70 पासपोर्ट हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन पासपोर्ट धारकों से पूछताछ और उनके दस्तावेजों की जांच के बाद संदिग्धों की संख्या और बढ़ सकती है। एसटीएफ अब केवल पासपोर्ट धारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की भूमिका भी तलाश रही है जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी पते, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य प्रमाण तैयार कराने में मदद की।

एक पते पर करीब 40 लोगों के पासपोर्ट बने

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात भोपाल के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते से जुड़ी सामने आयी है। एसटीएफ को जानकारी मिली है कि इसी पते का इस्तेमाल करते हुए करीब 40 लोगों के पासपोर्ट जारी किये गये।

एक ही आवासीय पते पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पासपोर्ट जारी होने से पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गये हैं। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन लोगों का वास्तव में उस पते से कोई संबंध था या नहीं।

इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मठ के पते का इस्तेमाल किसकी मदद से किया गया और संबंधित दस्तावेजों को किस तरह तैयार या सत्यापित कराया गया।

70 पासपोर्ट जांच के दायरे में

एसटीएफ फिलहाल करीब 70 पासपोर्ट की जांच कर रही है। इनमें से अधिकांश पासपोर्ट वर्ष 2021-22 के दौरान जारी किये गये थे। जांच टीम पासपोर्ट धारकों के वर्तमान और पुराने पते की जानकारी जुटा रही है।

अधिकारियों की कोशिश है कि आवेदन के समय जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था, उनकी वास्तविकता की जांच की जाए। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोग वास्तव में उन पतों पर रहते थे या केवल दस्तावेजों में उनका पता दिखाया गया था।

फर्जी पते के सहारे भारतीय पासपोर्ट लेने का आरोप

जांच एजेंसी को शुरुआती पड़ताल में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ लोगों ने मध्य प्रदेश के आवासीय पते से संबंधित दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पासपोर्ट हासिल किये। आरोप है कि इसके लिए जाली या गलत दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों को किसने तैयार किया, किसने आवेदकों को उपलब्ध कराया और पासपोर्ट आवेदन की प्रक्रिया में उनकी मदद किस व्यक्ति या समूह ने की।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि आवेदकों ने अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया किस तरह पूरी की।

पुलिस वेरिफिकेशन में खामियों की जांच

मामले में पुलिस वेरिफिकेशन की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गयी है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में कुछ मामलों में आवेदकों के पते और पहचान की पुष्टि करने के लिए किये गये फील्ड वेरिफिकेशन में कथित खामियां सामने आयी हैं।

जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पुलिसकर्मियों ने आवेदकों के दिये गये पते पर जाकर वास्तविक भौतिक सत्यापन किया था या नहीं। यदि सत्यापन किया गया था तो एक ही पते पर बड़ी संख्या में लोगों के रहने की जानकारी सामने क्यों नहीं आयी, यह भी जांच का अहम सवाल है।

हालांकि, किसी कर्मचारी की आपराधिक संलिप्तता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नगर निगम और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में

एसटीएफ की जांच केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं है। नगर निगम और अन्य सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी यह देख रही है कि आवेदकों की पहचान और पते को साबित करने वाले दस्तावेज किस तरह तैयार हुए। यदि इन दस्तावेजों में सरकारी रिकॉर्ड का इस्तेमाल हुआ है तो रिकॉर्ड तैयार करने या सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

अधिकारियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल पासपोर्ट आवेदन तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए दस्तावेजों के पूरे स्रोत और उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है।

विदेश यात्रा करने वाले पासपोर्ट धारक भी जांच के घेरे में

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गयी है क्योंकि जांच में कुछ पासपोर्ट धारकों के विदेश जाने की जानकारी सामने आयी है। कुछ लोगों का पता विदेश में होने की बात सामने आयी है, जबकि अन्य की यात्रा हिस्ट्री में कंबोडिया, स्पेन, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों की यात्राएं दर्ज हैं।

जांचकर्ता अब इन यात्राओं का उद्देश्य भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इन पासपोर्टों का इस्तेमाल केवल भारतीय पहचान हासिल करने के लिए किया गया था या इनके जरिए विदेश यात्रा और लोगों की आवाजाही से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।

बांग्लादेशी नागरिकों से कनेक्शन की आशंका

एसटीएफ को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि संदिग्ध नेटवर्क में बांग्लादेश से भारत आने वाले कुछ लोगों की भूमिका हो सकती है। आरोप है कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिये खुद को भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की।

इस पहलू की जांच बेहद संवेदनशील तरीके से की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध विदेशी नागरिकों को मध्य प्रदेश का पता किसने उपलब्ध कराया और उनके लिए पहचान से जुड़े दस्तावेज कैसे तैयार किये गये।

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या ऐसे लोगों को आगे विदेश यात्रा या दूसरे देशों में जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराया गया।

असम और दूसरे राज्यों में भेजी गयी जांच टीमें

पासपोर्ट धारकों के वास्तविक पते और पहचान की पुष्टि के लिए एसटीएफ की टीमें मध्य प्रदेश के बाहर भी भेजी गयी हैं। जांच टीमों को असम और अन्य स्थानों पर जाकर दस्तावेजों में दर्ज लोगों और पतों का सत्यापन करने को कहा गया है।

टीमें यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में जिन लोगों के नाम और पते दर्ज हैं, वे वास्तव में वहां रहते थे या नहीं। यदि किसी पते पर संबंधित व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो उस दस्तावेज की भूमिका और उसे तैयार करने वाले नेटवर्क की जांच आगे बढ़ायी जाएगी।

दो संदिग्धों की गिरफ्तारी

एसटीएफ ने इस कथित नेटवर्क की जानकारी मिलने के बाद मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इन पर पासपोर्ट आवेदन के लिए कथित तौर पर फर्जी आवासीय पते साबित करने वाले दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में मदद करने का आरोप है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

जांच एजेंसी को आशंका है कि यह काम अकेले दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता।

करीब 100 लोगों तक पहुंच सकती है कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, जांच में संदिग्ध लोगों की संख्या बढ़ सकती है। करीब 70 पासपोर्ट की जांच चल रही है और प्रत्येक पासपोर्ट धारक की पहचान तथा दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

जांच के दौरान यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी और आपराधिक नेटवर्क से संबंध साबित होते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले में करीब 100 लोगों तक कार्रवाई पहुंच सकती है।

हालांकि, अभी जांच जारी है और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका को अलग-अलग सत्यापित किया जा रहा है।

पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया पर भी सवाल

इस मामले ने पासपोर्ट जारी होने से पहले होने वाले पुलिस वेरिफिकेशन और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। एक ही पते पर बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद जांचकर्ता यह समझना चाहते हैं कि सिस्टम में कथित गड़बड़ी कहां हुई।

क्या आवेदकों के दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं हुई? क्या फील्ड वेरिफिकेशन महज औपचारिकता बनकर रह गया? या फिर किसी संगठित नेटवर्क ने सरकारी प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाया? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आयेंगे।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की भी जांच

विदेश यात्रा करने वाले संदिग्ध पासपोर्ट धारकों के कारण जांच का दायरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या फर्जी भारतीय पासपोर्ट केवल पहचान बदलने के लिए हासिल किये गये या इनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की आवाजाही के लिए भी हुआ।

यात्रा रिकॉर्ड, पासपोर्ट आवेदन, मोबाइल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को आपस में जोड़कर जांच की जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल एसटीएफ की जांच जारी है। एक ही पते पर करीब 40 लोगों के पासपोर्ट बनने, 70 पासपोर्ट के जांच दायरे में आने, संदिग्ध विदेशी नागरिकों के कनेक्शन और विदेश यात्रा की जानकारी सामने आने से मामला गंभीर हो गया है।

जांच एजेंसी अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों, पते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क, पुलिस वेरिफिकेशन में कथित लापरवाही और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े लोगों की भूमिका की कड़ियां जोड़ रही है।