झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनके परिवार को कथित तौर पर AI अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवती ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई कथित अश्लील तस्वीरों का इस्तेमाल कर रेलवे अधिकारी और उनके परिजनों पर दबाव बनाया। परिवार को तस्वीरें सार्वजनिक करने और गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर 15 लाख रुपये की मांग की गई।

शिकायत के मुताबिक, इस कथित ब्लैकमेलिंग के दौरान परिवार से अलग-अलग तारीखों में करीब 40 हजार रुपये भी लिए गए। जब लगातार धमकियां मिलने लगीं तो अधिकारी की पत्नी ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद नवाबाद थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने जांच शुरू की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी युवती को प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया है। अब इन दोनों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल डिवाइस से कथित ब्लैकमेलिंग की पूरी कड़ी और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

झांसी के वरिष्ठ रेलवे अधिकारी को बनाया निशाना

अपर पुलिस अधीक्षक सिमरन सिंह के अनुसार, शिकायत में जितेंद्र कुमार शर्मा का नाम सामने आया है, जो झांसी मंडल रेलवे में वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (DSC) के पद पर तैनात हैं।

उनकी पत्नी अंकिता भारद्वाज ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि कर्नाटक की रहने वाली मरीना लॉजरस उर्फ मरीना ने उनके पति और परिवार को कथित तौर पर ब्लैकमेल करना शुरू किया।

शिकायत के अनुसार, युवती ने AI तकनीक से तैयार की गई कथित अश्लील तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए परिवार पर दबाव बनाया। आरोप है कि तस्वीरों को वायरल करने और परिवार के सदस्यों को आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी गयी।

WhatsApp कॉल के जरिए 15 लाख रुपये की मांग

परिवार का आरोप है कि युवती ने WhatsApp कॉल के माध्यम से संपर्क किया और 15 लाख रुपये की मांग रखी। कथित तौर पर धमकी दी गयी कि यदि रकम नहीं दी गयी तो तस्वीरों को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी की पत्नी ने नवाबाद थाने में शिकायत दर्ज करायी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी जानकारियों को खंगालना शुरू किया। इसी जांच के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया गया।

पहले 40 हजार रुपये वसूले, फिर बढ़ी मांग

शिकायत में परिवार ने आरोप लगाया कि कथित ब्लैकमेलिंग के दौरान कई बार रकम भेजी गयी। जनवरी से जून के बीच कुल सात अलग-अलग लेनदेन होने की बात कही गयी है।

परिवार के अनुसार, 13 जनवरी को 5 हजार रुपये, 9 मार्च को 10 हजार रुपये, 21 मार्च को 7 हजार रुपये, 30 मार्च को 3 हजार रुपये, 27 अप्रैल को 3 हजार रुपये, 8 मई को 2 हजार रुपये और 5 जून को 10 हजार रुपये भेजे गये।

इस तरह सात लेनदेन में कुल करीब 40 हजार रुपये दिये जाने की बात सामने आयी है।

परिवार का आरोप है कि रकम देने के बावजूद कथित ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई। इसके बाद मांग बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गयी।

अलग-अलग तारीखों में हुए सात ट्रांजेक्शन

पुलिस के लिए अब इन सातों लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गयी है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं कि रकम किस खाते या माध्यम में भेजी गयी और उस खाते का वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा था।

इसके अलावा पुलिस यह भी देख रही है कि प्रत्येक भुगतान के बाद आरोपी की ओर से परिवार से किस तरह संपर्क किया गया।

यदि डिजिटल और वित्तीय जांच से सभी लेनदेन एक ही व्यक्ति या नेटवर्क से जुड़े मिलते हैं तो मामले की आगे की जांच में मदद मिल सकती है।

सरकारी आवास तक पहुंचने का भी आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता अंकिता भारद्वाज के अनुसार, आरोपी युवती कथित तौर पर 2 जून को उनके पति के सरकारी आवास तक पहुंची थी।

आरोप है कि वहां उसने हंगामा किया और गाली-गलौज भी की। इसी दौरान कथित तौर पर 15 लाख रुपये की मांग की गयी।

इस घटना के बाद परिवार का कहना है कि उनकी परेशानी और बढ़ गयी थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी युवती अधिकारी के सरकारी आवास तक किस तरह पहुंची और उसके पास परिवार से संबंधित कौन-कौन सी जानकारी थी।

पुलिस ने प्रयागराज से आरोपी को पकड़ा

शिकायत मिलने के बाद नवाबाद थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल नंबर समेत उपलब्ध डिजिटल सुरागों को जांच का आधार बनाया।

जांच के दौरान बुधवार को आरोपी युवती की लोकेशन प्रयागराज में मिलने की जानकारी सामने आयी। इसके बाद झांसी पुलिस की टीम प्रयागराज पहुंची।

पुलिस के अनुसार, आरोपी युवती को प्रयागराज रेलवे स्टेशन से गुरुवार को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे झांसी लाया गया और पूछताछ की गयी।

पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन और लैपटॉप भी बरामद किया है।

मोबाइल और लैपटॉप में छिपे हो सकते हैं अहम सुराग

गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर केंद्रित हो गयी है। मोबाइल और लैपटॉप से कथित ब्लैकमेलिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पुलिस इन उपकरणों में मौजूद WhatsApp चैट, कॉल हिस्ट्री, संपर्क नंबर, तस्वीरों और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच कर सकती है।

जांचकर्ताओं की कोशिश होगी कि यह पता लगाया जाए कि आरोपी ने अधिकारी और उनके परिवार से कब-कब संपर्क किया और किस तरह की मांग या धमकी दी।

AI से बनी तस्वीरों की भी होगी तकनीकी जांच

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित AI-निर्मित अश्लील तस्वीरें हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तस्वीरें वास्तव में AI तकनीक से तैयार की गयी थीं या उनमें किसी अन्य तरह की डिजिटल छेड़छाड़ की गयी थी।

किसी तस्वीर को केवल देखकर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि वह वास्तविक है या AI से तैयार की गयी है। इसके लिए तकनीकी और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जरूरत होती है।

यदि जांच में तस्वीरों के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो पुलिस इस पहलू को भी मामले में शामिल कर सकती है।

क्या युवती के साथ कोई और भी शामिल था?

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कथित ब्लैकमेलिंग का पूरा खेल अकेले आरोपी युवती चला रही थी या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

परिवार की ओर से भी किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आशंका जतायी गयी है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप में मौजूद संपर्कों और बातचीत की जांच करेगी।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चैट से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि आरोपी किसी अन्य व्यक्ति से इस मामले को लेकर लगातार संपर्क में थी या नहीं।

बैंक लेनदेन की भी पड़ताल

मामले में करीब 40 हजार रुपये दिये जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस भुगतान के माध्यम की भी जांच कर सकती है।

जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से भेजी गयी। यदि पैसे किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में गये हैं तो पुलिस यह पता लगा सकती है कि उस व्यक्ति का आरोपी से क्या संबंध है।

इससे कथित ब्लैकमेलिंग के पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आने की संभावना की भी जांच की जा सकती है।

जनवरी से जून तक चलता रहा कथित ब्लैकमेलिंग का सिलसिला

शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर जनवरी से जून तक अलग-अलग समय पर परिवार से रकम ली गयी। सात लेनदेन में करीब 40 हजार रुपये दिये जाने के बाद भी कथित मांग खत्म नहीं हुई।

इसके बाद 15 लाख रुपये की मांग सामने आयी। इससे पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित ब्लैकमेलिंग की शुरुआत किस वजह से हुई और आरोपी को परिवार से जुड़ी जानकारी या तस्वीरें कहां से मिलीं।

डिजिटल अपराध की नई चुनौती

यह मामला डिजिटल तकनीक के गलत इस्तेमाल से जुड़े एक गंभीर खतरे की ओर भी इशारा करता है। AI तकनीक के माध्यम से तस्वीरों में बदलाव करना या नकली सामग्री तैयार करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

यदि ऐसी कथित सामग्री का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को बदनाम करने, डराने या पैसे वसूलने के लिए किया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है।

झांसी के इस मामले में भी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तस्वीरें किसने तैयार कीं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

आरोपी को जेल भेजा गया

पुलिस ने आरोपी युवती को प्रयागराज से गिरफ्तार करने के बाद झांसी लाकर पूछताछ की। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

हालांकि, गिरफ्तारी के बाद भी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। पुलिस अब बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच के साथ कथित ब्लैकमेलिंग के पूरे नेटवर्क को समझने का प्रयास कर रही है।

जांच से खुल सकते हैं कई राज

पुलिस की डिजिटल जांच में यह सामने आ सकता है कि कथित अश्लील तस्वीरें कहां से मिलीं, उन्हें किसने तैयार किया, परिवार से संपर्क करने के लिए कौन-कौन से नंबर इस्तेमाल हुए और 40 हजार रुपये किन माध्यमों से लिये गये।

इसके साथ ही 15 लाख रुपये की मांग के पीछे आरोपी का उद्देश्य क्या था और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।