कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल Nandigram विधानसभा सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गई है। 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले यहां मुकाबला सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच नहीं रह गया है, बल्कि टीएमसी के भीतर का विवाद, कांग्रेस की अलग रणनीति और अलग-अलग राजनीतिक धड़ों की मौजूदगी ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के उम्मीदवार को लेकर है। पार्टी ने नंदीग्राम से हसिरानी रथ को मैदान में उतारा है। हसिरानी रथ दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और पूर्व निजी सहायक रहे थे। चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है।

Nandigram सीट पर क्यों टिकी हैं सबकी नजरें?

नंदीग्राम का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने इस इलाके को राज्य की राजनीति में खास पहचान दिलाई थी। इसके बाद नंदीग्राम ममता बनर्जी की राजनीति से भी गहराई से जुड़ गया।

2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी ने जीत दर्ज की और बाद में भवानीपुर सीट को अपने पास रखते हुए नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ दी। इसी वजह से यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया

उपचुनाव की घोषणा के बाद यह अटकलें तेज थीं कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़कर विधानसभा में वापसी कर सकती हैं। लेकिन टीएमसी के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार घोषित कर दिया।

इस फैसले के साथ यह साफ हो गया कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम के चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगी। 6 अक्टूबर को होने वाले इस उपचुनाव के जरिए टीएमसी अपने उम्मीदवार के माध्यम से सीट पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

बीजेपी ने हसिरानी रथ को क्यों चुना?

बीजेपी का हसिरानी रथ को उम्मीदवार बनाना इस चुनाव में भावनात्मक और राजनीतिक दोनों पहलुओं को सामने लाता है।

हसिरानी रथ के बेटे चंद्रनाथ रथ शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक थे। विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दो दिन बाद 6 मई को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को लेकर बीजेपी ने राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया है।

हसिरानी रथ के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। बीजेपी की ओर से उनके नाम को सामने लाने से चुनाव प्रचार में चंद्रनाथ रथ की हत्या का मुद्दा भी प्रमुखता से उठने की संभावना है।

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की CBI जांच

चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI के पास है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हत्या की साजिश से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार भी किया गया है।

हालांकि, मामले की जांच जारी है और हत्या के पीछे की पूरी आपराधिक साजिश को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इस मामले से जुड़े राजनीतिक आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

शुभेंदु अधिकारी ने लगाए 2 करोड़ रुपये की सुपारी के आरोप

हसिरानी रथ के नामांकन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की सुपारी दी गई थी और इसके पीछे एक तथाकथित “भाइपो गैंग” का हाथ था।

यह शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक आरोप है। उन्होंने अपने बयान में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों की ओर इशारा किया, हालांकि मामले में आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, हत्या की जांच CBI के पास है।

टीएमसी के भीतर भी बढ़ी खींचतान

नंदीग्राम का मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि टीएमसी खुद अंदरूनी विवाद से गुजर रही है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को मैदान में उतारा है। दोनों गुट टीएमसी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं।

चुनाव आयोग के सामने भी दोनों पक्षों के दावे का मामला चल रहा है। 16 सितंबर नामांकन की अंतिम तारीख है और इस समय तक चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई थी।

कांग्रेस ने भी अलग रास्ता चुना

नंदीग्राम में कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार उतार रही है। कांग्रेस की ओर से अलग चुनाव लड़ने की रणनीति ने विपक्षी वोटों के समीकरण को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की ओर से यह दावा किया गया कि टीएमसी ने नंदीग्राम सीट कांग्रेस को चुनाव लड़ने के लिए देने की पेशकश की थी। हालांकि टीएमसी ने इस दावे से इनकार किया है। इसलिए इस मुद्दे पर दोनों दलों के बयान अलग-अलग हैं।

लेफ्ट भी मुकाबले में

नंदीग्राम में सिर्फ बीजेपी, टीएमसी और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि वाम मोर्चा भी मैदान में है। CPI ने यहां शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया है। इससे मुकाबला और बहुकोणीय हो गया है।

ऐसे में नंदीग्राम के मतदाताओं के सामने कई राजनीतिक विकल्प मौजूद हैं और अलग-अलग उम्मीदवारों की मौजूदगी चुनावी गणित को जटिल बनाती है।

क्या नंदीग्राम ममता की विधानसभा वापसी का रास्ता था?

ममता बनर्जी के नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद वह विधानसभा में नहीं हैं। ऐसे में नंदीग्राम से उनके चुनाव लड़ने की स्थिति बनती तो यह उपचुनाव उनके राजनीतिक पुनर्प्रवेश से भी जुड़ जाता।

लेकिन टीएमसी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। पार्टी ने संचिता प्रधान डे को मैदान में उतारा है। इसलिए फिलहाल नंदीग्राम उपचुनाव ममता बनर्जी की व्यक्तिगत विधानसभा वापसी का चुनाव नहीं है, बल्कि टीएमसी के संगठनात्मक प्रभाव और विपक्षी राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाबला है।

बीजेपी के लिए भी नंदीग्राम क्यों अहम?

Nandigram शुभेंदु अधिकारी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। 2026 में उन्होंने यहां जीत दर्ज की और भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम से इस्तीफा दिया। अब बीजेपी ने उनके करीबी सहयोगी रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसिरानी रथ को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को स्थानीय राजनीतिक विरासत और भावनात्मक मुद्दों से भी जोड़ दिया है।

बीजेपी के अभियान में शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। उन्होंने नंदीग्राम में पार्टी के पक्ष में बड़े अंतर से जीत का दावा भी किया है, लेकिन चुनाव परिणाम के बारे में अंतिम निष्कर्ष मतदान और मतगणना के बाद ही निकलेगा।

Nandigram में अब क्या-क्या मुद्दे रहेंगे?

इस उपचुनाव में कई मुद्दे एक साथ दिखाई दे रहे हैं—

  • चंद्रनाथ रथ हत्याकांड और उसकी CBI जांच
  • राजनीतिक हिंसा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
  • टीएमसी के दो गुटों के बीच विवाद
  • बीजेपी का स्थानीय संगठन और शुभेंदु अधिकारी का प्रभाव
  • कांग्रेस और वाम दलों का अलग चुनाव लड़ना
  • ममता बनर्जी का खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरना
  • नंदीग्राम के मतदाताओं के बीच स्थानीय मुद्दे और विकास से जुड़े सवाल

इन सभी मुद्दों के कारण नंदीग्राम का उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण मुकाबला बन गया है।

Nandigram में मुकाबला कई परतों वाला

Nandigram उपचुनाव में बीजेपी ने हसिरानी रथ को उम्मीदवार बनाकर चंद्रनाथ रथ की हत्या से जुड़े भावनात्मक मुद्दे को चुनावी विमर्श में जगह दी है। वहीं टीएमसी के भीतर दो गुटों की मौजूदगी और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद ने ममता बनर्जी के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर दी है।

हालांकि यह कहना कि बीजेपी के इस कदम ने ममता बनर्जी की “कमबैक की राह पूरी तरह बंद” कर दी है, अभी चुनावी तथ्य के रूप में कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है और टीएमसी ने अपने उम्मीदवार के जरिए सीट पर मुकाबला करने की रणनीति अपनाई है।

नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर 2026 को और मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को होगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस राजनीतिक समीकरण को स्वीकार किया।