जमशेदपुर: प्रजापिता BrahmaKumari ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कदमा शाखा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पवित्रता, आत्म-सुरक्षा और परमात्म स्नेह का संदेश देने वाला विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक उल्लास, शांति और दिव्यता से भरा रहा। समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने ब्रह्माकुमारी केंद्र पहुंचकर परमात्म रक्षा सूत्र बंधवाया और सकारात्मक, पवित्र एवं श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षाबंधन को केवल एक सामाजिक परंपरा तक सीमित न रखते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना था। इस दौरान उपस्थित लोगों को बताया गया कि सच्ची सुरक्षा केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन के नकारात्मक विचारों, विकारों और गलत संस्कारों से स्वयं की रक्षा करने में भी निहित है।
विभिन्न वर्गों के लोगों ने लिया हिस्सा
कदमा स्थित ब्रह्माकुमारी केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर ट्रैफिक डीएसपी श्री नीरज जी अपनी पूरी टीम के साथ केंद्र पहुंचे। उन्होंने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करते हुए रक्षा सूत्र बंधवाया।

इसके अलावा समाजसेवी श्री मुकेश मित्तल जी एवं श्री संतोष अग्रवाल जी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री उपेंद्र गिरी जी अपनी पूरी टीम के साथ ब्रह्माकुमारी केंद्र पहुंचे और आध्यात्मिक रक्षा सूत्र बंधवाया।
वहीं वरिष्ठ नागरिक संगठन के अध्यक्ष श्री पुरन वर्मा जी भी संगठन के सदस्यों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी अतिथियों ने ब्रह्माकुमारी बहनों से आध्यात्मिक संदेश प्राप्त किया और पवित्रता एवं सकारात्मक जीवन के संकल्प को महत्व दिया।
रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, आध्यात्मिक स्मृति का प्रतीक
कार्यक्रम के दौरान बी.के. संजू बहन ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र केवल कलाई पर बांधा जाने वाला एक सामान्य धागा नहीं है, बल्कि यह आत्मा को उसकी मूल पवित्रता, शांति और परमात्म संबंध की याद दिलाने वाला सूत्र है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य को बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ अपने विचारों, भावनाओं और संस्कारों की भी रक्षा करने की आवश्यकता है। जीवन में कई प्रकार की परिस्थितियां आती हैं, जिनके कारण मन में तनाव, क्रोध, भय, अहंकार और नकारात्मकता पैदा हो सकती है। ऐसे में आत्मिक शक्ति और परमात्मा से जुड़ाव व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाने में सहायता करता है।
आत्म-सुरक्षा का दिया संदेश
बी.के. संजू बहन ने कहा कि जब व्यक्ति परमात्मा से अपना संबंध जोड़कर क्रोध, अहंकार, नकारात्मकता, व्यसन और विभिन्न विकारों से स्वयं की रक्षा करता है, तभी वास्तविक अर्थों में रक्षाबंधन सार्थक होता है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि रक्षाबंधन के अवसर पर केवल एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प न लें, बल्कि स्वयं के विचारों और व्यवहार को भी श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करें। मन में सकारात्मक विचारों को स्थान देकर, दूसरों के प्रति सम्मान की भावना रखते हुए और श्रेष्ठ कर्म करके जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है।
उन्होंने सभी से पवित्र जीवन, नशामुक्त जीवन और श्रेष्ठ कर्मों का संकल्प लेने का आह्वान किया।
अतिथियों को बांधा गया ईश्वरीय स्मृति का रक्षा सूत्र
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी केंद्र में पहुंचे सभी अतिथियों एवं उपस्थित भाई-बहनों को ईश्वरीय स्मृति का रक्षा सूत्र बांधा गया। रक्षा सूत्र बांधते हुए उन्हें परमात्म स्नेह, शांति, पवित्रता और सुखमय जीवन की शुभकामनाएं दी गईं।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक वातावरण में रक्षाबंधन के महत्व को समझा और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा प्राप्त की।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि रक्षा सूत्र व्यक्ति को निरंतर यह स्मरण कराता है कि उसे अपने जीवन में अच्छे विचारों, श्रेष्ठ संस्कारों और सकारात्मक व्यवहार को अपनाना चाहिए।
रक्षाबंधन को आत्म-सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास
ब्रह्माकुमारी केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षाबंधन को एक व्यापक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। सामान्य रूप से रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक रिश्तों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व आत्मा की पवित्रता और श्रेष्ठ संस्कारों की रक्षा का संदेश भी देता है।
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को बताया गया कि मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे संकल्प लेने चाहिए, जो उसे बुराइयों और नकारात्मक आदतों से दूर रखें। आत्म-सम्मान, संयम, सकारात्मक सोच और परमात्म स्मृति व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं।
LIC कार्यालय में भी पहुंचाया गया आध्यात्मिक संदेश
रक्षाबंधन कार्यक्रम के तहत ब्रह्माकुमारी केंद्र की ओर से सामाजिक संपर्क की पहल को आगे बढ़ाते हुए बी.के. संजू बहन एवं बी.के. रेशमा बहन कदमा स्थित LIC कार्यालय भी पहुंचीं।
वहां उन्होंने डायरेक्टर श्री एम.के. पांडा जी सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पवित्रता और परमात्म स्नेह का रक्षा सूत्र बांधा। इस अवसर पर सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी गईं।
LIC कार्यालय में आयोजित इस आध्यात्मिक मिलन के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को श्रेष्ठ कर्म, सकारात्मक सोच और तनावमुक्त जीवन के लिए आध्यात्मिक संदेश दिया गया।
सकारात्मक सोच और तनावमुक्त जीवन पर जोर
आध्यात्मिक संदेश के दौरान सकारात्मक सोच के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। वर्तमान समय में कार्यस्थल और व्यक्तिगत जीवन में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों में मन को शांत और संतुलित रखना आवश्यक है।
BrahmaKumari बहनों ने संदेश दिया कि सकारात्मक दृष्टिकोण, श्रेष्ठ विचार और आत्मिक जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर सकता है।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने तथा अपने कर्मों में पवित्रता और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
नशामुक्त और पवित्र जीवन का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त जीवन को भी विशेष महत्व दिया गया। उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे नशे और अन्य ऐसी आदतों से दूर रहें, जो शरीर और मन दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
पवित्र जीवन का अर्थ केवल बाहरी रूप से अनुशासित रहना नहीं, बल्कि अपने विचारों और भावनाओं को भी सकारात्मक एवं श्रेष्ठ बनाना है। इसी संदेश को रक्षाबंधन के रक्षा सूत्र के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
सामाजिक और आध्यात्मिक समरसता का संदेश
कदमा में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम ने सामाजिक और आध्यात्मिक समरसता का संदेश भी दिया। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों का एक साथ आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल होना इस बात को दर्शाता है कि शांति, पवित्रता और सकारात्मक जीवन जैसे मूल्य सभी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम में किसी विशेष वर्ग या समुदाय तक संदेश को सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक हित की बात की गई। परमात्म स्नेह और आत्मिक शांति को मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
रक्षाबंधन को बनाया आत्मिक जागरूकता का पर्व
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने रक्षाबंधन को केवल सामाजिक परंपरा के रूप में मनाने के बजाय इसे आत्म-सुरक्षा, पवित्रता, परमात्म संबंध और श्रेष्ठ संस्कारों का पर्व बनाने का संदेश दिया।
रक्षा सूत्र के माध्यम से लोगों को यह स्मरण कराया गया कि व्यक्ति को अपने जीवन में बुराइयों से स्वयं की रक्षा करनी चाहिए और अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।
प्रजापिता BrahmaKumari ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कदमा शाखा में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक सरोकार का सुंदर उदाहरण रहा। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर परमात्म रक्षा सूत्र बंधवाया और पवित्रता, सकारात्मकता एवं श्रेष्ठ कर्मों का संदेश प्राप्त किया।
बी.के. संजू बहन ने रक्षाबंधन को आत्मिक सुरक्षा से जोड़ते हुए लोगों को क्रोध, अहंकार, नकारात्मकता, व्यसन और विकारों से स्वयं की रक्षा करने का संदेश दिया। वहीं बी.के. संजू बहन एवं बी.के. रेशमा बहन द्वारा LIC कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रक्षा सूत्र बांधना इस आध्यात्मिक संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल रही।
कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि वास्तविक रक्षाबंधन केवल बाहरी सुरक्षा का पर्व नहीं, बल्कि अपने विचारों, संस्कारों और जीवन की पवित्रता की रक्षा करने का संकल्प भी है। परमात्म स्नेह, शांति, सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से जीवन को अधिक सुखमय और सार्थक बनाया जा सकता है।




















