चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दूसरे दिन उपायुक्त मनीष कुमार ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय Baranga का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं आधारभूत संसाधनों के साथ-साथ संचालित शैक्षणिक गतिविधियों की स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में जाकर अध्ययनरत विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, विषयों की समझ, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं और अध्ययन में उनकी रुचि के बारे में जानकारी प्राप्त की। उपायुक्त ने विद्यार्थियों के साथ सहज माहौल में बातचीत करते हुए उनकी जिज्ञासाओं को भी सुना और शिक्षा के महत्व को समझाया।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

विद्यार्थियों से जाना पढ़ाई का स्तर

विद्यालय निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कक्षा में मौजूद छात्राओं से उनके अध्ययन से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की। उन्होंने पूछा कि उन्हें कौन-कौन से विषय पढ़ाए जा रहे हैं, पढ़ाई में उनकी रुचि किन विषयों में अधिक है और कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों को वे किस प्रकार समझ रही हैं।

उपायुक्त ने विद्यार्थियों से विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि पढ़ाई के दौरान किसी विषय को समझने में कठिनाई हो तो शिक्षक से बेझिझक अपनी जिज्ञासा साझा करनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, सोचने की क्षमता और भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नियमित विद्यालय आने और लक्ष्य पर ध्यान देने की अपील

उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निरंतरता बेहद जरूरी है। प्रतिदिन विद्यालय आकर कक्षा में ध्यानपूर्वक पढ़ाई करने और शिक्षकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का पालन करने से विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन, मेहनत और निरंतर प्रयास की है। उन्होंने बच्चों को अपने भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं का भी किया निरीक्षण

विद्यार्थियों से संवाद के साथ उपायुक्त ने विद्यालय परिसर में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने कक्षाओं, विद्यालय परिसर तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों की स्थिति की जानकारी ली।

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से उपलब्ध सुविधाओं के उपयोग, विद्यार्थियों की संख्या और विद्यालय में संचालित गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, स्वच्छता और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया।

उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए केवल शिक्षक और पाठ्यक्रम ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विद्यालय में बेहतर वातावरण और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी है।

मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता का लिया जायजा

विद्यालय निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विद्यार्थियों के लिए तैयार किए जा रहे मध्याह्न भोजन की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं संबंधित कर्मियों से भोजन की तैयारी और विद्यार्थियों को भोजन परोसे जाने की व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पौष्टिक, गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति और उनके स्वास्थ्य के लिए मध्याह्न भोजन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए भोजन तैयार करने से लेकर विद्यार्थियों को परोसने तक हर स्तर पर स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

स्वच्छता और पोषण को लेकर विशेष सतर्कता के निर्देश

उपायुक्त ने भोजन तैयार करने वाले स्थान और आसपास की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने संबंधित कर्मियों को निर्देशित किया कि भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ पोषण और स्वच्छता पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।

दिव्यांग शिक्षक गुलशन लोहार के समर्पण की उपायुक्त ने की सराहना

विद्यालय निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार की मुलाकात विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे दिव्यांग शिक्षक गुलशन लोहार से हुई। उपायुक्त ने शिक्षक के कार्य के प्रति समर्पण, जिम्मेदारी और विद्यार्थियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

उन्होंने शिक्षक गुलशन लोहार से बातचीत करते हुए उनके अनुभव और विद्यालय में शिक्षण कार्य से संबंधित जानकारी ली। इस दौरान उपायुक्त ने उनके कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों की सराहना की।

उपायुक्त ने कहा कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर अपनी सेवाएं देना प्रेरणादायी है। उन्होंने शिक्षक गुलशन लोहार के समर्पण को विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर बढ़ाया हौसला

इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने शिक्षक गुलशन लोहार को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया।

उपायुक्त के इस आत्मीय व्यवहार से विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मी भी उत्साहित नजर आए। विद्यालय परिवार की ओर से भी शिक्षक के प्रति सम्मान और उनके कार्य की सराहना को सकारात्मक रूप से देखा गया।

उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षकों का समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी ही विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता

उपायुक्त ने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ विद्यालय में उपलब्ध सभी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए समान अवसर और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर नियमित रूप से ध्यान दिया जाए तथा जिन विद्यार्थियों को किसी विषय में कठिनाई हो रही है, उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

अनुशासन, स्वच्छता और विद्यार्थियों की सहभागिता पर जोर

उपायुक्त ने विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ अनुशासन और स्वच्छता पर भी निरंतर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है।

उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और सहयोग की भावना विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

विद्यालय प्रबंधन को संसाधनों के बेहतर उपयोग का निर्देश

निरीक्षण के अंत में उपायुक्त ने विद्यालय प्रबंधन को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और उनकी शैक्षणिक जरूरतों को समझने पर जोर दिया। साथ ही विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने, स्वच्छता एवं पोषण पर ध्यान देने तथा विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयास करने को कहा।

उपायुक्त मनीष कुमार के निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों की पढ़ाई, आधारभूत सुविधाओं, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और शिक्षक के समर्पण जैसे विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। निरीक्षण के माध्यम से उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।