रांची: ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO), झारखंड प्रदेश काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक विगत कल केंद्रीय काउंसिल के अध्यक्ष सौरभ घोष की उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक में झारखंड की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, सरकारी विद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों के रिक्त पद, छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में संगठन ने निर्णय लिया कि प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े विभिन्न सवालों को लेकर छात्र आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 19 और 20 दिसंबर को रांची में AIDSO का 8वां झारखंड राज्य छात्र सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक और विकसित समाज की आधारशिला है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है। इसके बावजूद सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है।

संगठन की ओर से सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के फैसलों पर चिंता व्यक्त की गई। AIDSO ने मांग की कि सरकारी विद्यालयों को बंद करने के बजाय उनमें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और उन्हें मजबूत बनाया जाए, ताकि गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चों को बेहतर एवं सुलभ शिक्षा मिल सके।

सरकारी स्कूलों को बंद करने का विरोध

AIDSO ने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने या उन्हें दूसरे विद्यालयों में विलय किए जाने की नीति का विरोध करने की बात कही। संगठन का कहना है कि सरकारी विद्यालयों पर सबसे अधिक निर्भरता गरीब, मजदूर, किसान और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की होती है।

यदि आसपास के विद्यालय बंद किए जाते हैं या उन्हें दूर के विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाता है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए विद्यालय तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

संगठन ने सरकार से मांग की कि विद्यालयों को बंद करने के बजाय उनमें पर्याप्त शिक्षक, भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

शिक्षकों के रिक्त पदों पर बहाली की मांग

बैठक में सरकारी विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। संगठन का कहना है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

AIDSO ने सरकार से मांग की कि रिक्त पदों का आंकड़ा सार्वजनिक करते हुए जल्द से जल्द पारदर्शी और निष्पक्ष नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए। योग्य एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर मिले और विद्यालयों में विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हों, इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की मांग

बैठक में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी उठाई गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं।

संगठन ने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए। पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति मिले, ताकि आर्थिक कारणों से किसी विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने की मांग

AIDSO ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग दोहराई। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए जाने चाहिए, जिनसे सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

बैठक में वक्ताओं ने शिक्षा को निजीकरण और व्यवसायीकरण से बचाने तथा सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष

बैठक में पूरे देश और झारखंड में विभिन्न परीक्षाओं में सामने आने वाली कथित धांधली और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। संगठन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत और ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार के निर्णय पर चर्चा

बैठक में प्रदेश सचिव सोहन महतो ने कहा कि वर्तमान में झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह मामला अब न्यायालय में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सर्वोच्च न्यायालय और रांची हाईकोर्ट इस पूरे मामले में संवेदनशील भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में विद्यार्थियों के हितों और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत निर्णय आवश्यक है। जो विद्यार्थी ईमानदारी और मेहनत के बल पर परीक्षा में सफल हुए हैं, उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए।

ईमानदार विद्यार्थियों की नौकरी सुरक्षित रखने की मांग

सोहन महतो ने कहा कि यदि किसी परीक्षा में अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी ईमानदारी से परीक्षा देकर सफल हुए विद्यार्थियों पर नहीं डाली जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने पूरी ईमानदारी से परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की है, उनकी पहचान कर उनकी नौकरी को सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। किसी भी बेगुनाह और मेहनती विद्यार्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

निष्पक्ष जांच जल्द पूरी करने की मांग

AIDSO ने सरकार से मांग की कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए। जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान की जा सके।

संगठन ने कहा कि किसी भी मामले में सामूहिक रूप से सभी सफल अभ्यर्थियों को दोषी मानना उचित नहीं है। जांच के आधार पर दोषी और निर्दोष विद्यार्थियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

संगठन ने कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार, कदाचार या अन्य अनियमितता के माध्यम से नौकरी प्राप्त करने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

AIDSO की मांग है कि ऐसे मामलों में केवल नौकरी से बर्खास्तगी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यदि आपराधिक कृत्य प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत आपराधिक मुकदमा भी चलाया जाना चाहिए।

रिक्त पदों पर नए सिरे से बहाली की मांग

संगठन ने यह भी मांग की कि यदि जांच के बाद किसी नियुक्ति को रद्द किया जाता है और पद रिक्त होते हैं, तो उन रिक्त पदों को भरने के लिए नए सिरे से बहाली प्रक्रिया शुरू की जाए।

इससे वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं को अवसर मिल सकेगा। संगठन का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष नियुक्ति प्रक्रिया के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों को आगे आने का मौका मिलना चाहिए।

वर्षों से तैयारी कर रहे छात्रों को मिले अवसर

AIDSO ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी कई वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई, समय और आर्थिक संसाधनों का निवेश किया है।

यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में पद रिक्त होते हैं, तो उन पदों को दोबारा भरने के लिए पारदर्शी विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए। इससे मेहनत करने वाले युवाओं को अपनी योग्यता साबित करने का अवसर मिलेगा।

8वें झारखंड राज्य छात्र सम्मेलन की तैयारी

बैठक में आगामी 19-20 दिसंबर को रांची में आयोजित होने वाले AIDSO के 8वें झारखंड राज्य छात्र सम्मेलन को लेकर भी चर्चा की गई। सम्मेलन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, विद्यार्थियों की समस्याओं, छात्रवृत्ति, शिक्षक नियुक्ति, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीति जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

छात्र आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान

AIDSO की बैठक में छात्र आंदोलन को और मजबूत करने का आह्वान किया गया। संगठन ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए छात्रों को संगठित होना आवश्यक है।

संगठन के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। इसलिए सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक सामाजिक समर्थन भी जरूरी है।

सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की रक्षा पर जोर

बैठक में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की रक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया। संगठन ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल और कॉलेज शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

सरकारी शिक्षा संस्थानों को कमजोर करने के बजाय उनमें निवेश बढ़ाने, शिक्षकों की नियुक्ति करने और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। इससे समाज के सभी वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध कराया जा सकता है।

छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने की मांग

AIDSO ने कहा कि किसी भी परीक्षा या नियुक्ति विवाद में सबसे अधिक ध्यान विद्यार्थियों के भविष्य पर दिया जाना चाहिए। मेहनत से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य किसी भी प्रशासनिक या परीक्षा संबंधी अनियमितता के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।

संगठन ने सरकार से मांग की कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक, कदाचार, भ्रष्टाचार या अन्य अनियमितताओं की संभावना कम से कम हो और विद्यार्थियों का संस्थागत व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

बैठक में प्रदेश के सभी नेतृत्वकारी साथी रहे उपस्थित

AIDSO झारखंड प्रदेश काउंसिल की बैठक में संगठन के प्रदेश के सभी नेतृत्वकारी साथी उपस्थित रहे। बैठक में शिक्षा और छात्र हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के साथ आगामी छात्र सम्मेलन की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

नेतृत्वकारी सदस्यों ने सम्मेलन को सफल बनाने तथा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा की।

छात्र सम्मेलन के माध्यम से उठेंगे शिक्षा से जुड़े सवाल

आगामी राज्य छात्र सम्मेलन के माध्यम से झारखंड की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न सवालों को व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी है। संगठन का कहना है कि सम्मेलन छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करने और आगे की आंदोलनात्मक एवं लोकतांत्रिक रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

सम्मेलन में सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षक नियुक्ति, छात्रवृत्ति, परीक्षा में पारदर्शिता, उच्च शिक्षा, शिक्षा नीति और छात्र अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।

शिक्षा और रोजगार के लिए संघर्ष जारी रखने की बात

AIDSO ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं को पारदर्शी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के सवाल पर संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि परीक्षा में मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं।

संगठन ने सरकार से मांग की कि वह शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करे और विद्यार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे।

AIDSO झारखंड प्रदेश काउंसिल की बैठक में आगामी 19 और 20 दिसंबर को रांची में 8वें झारखंड राज्य छात्र सम्मेलन के आयोजन की घोषणा के साथ शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया।

सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उन्हें मजबूत करने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर बहाली करने, जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने तथा परीक्षाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से सामने आई।

संगठन ने यह भी कहा कि परीक्षा संबंधी किसी विवाद में ईमानदारी से सफल हुए विद्यार्थियों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। सरकार को निष्पक्ष जांच के माध्यम से दोषियों और निर्दोषों की पहचान करनी चाहिए। दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ रिक्त पदों पर नए सिरे से बहाली की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए, ताकि वर्षों से तैयारी कर रहे छात्रों को अवसर मिल सके।

आगामी राज्य छात्र सम्मेलन के माध्यम से AIDSO इन मुद्दों को व्यापक छात्र समुदाय के बीच ले जाने और छात्र आंदोलन को और मजबूत करने की दिशा में कार्य करेगा।

निवेदक
प्रभात कुमार महतो
AIDSO, झारखंड