जमशेदपुर: Netaji सुभाष विश्वविद्यालय परिसर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न तकनीकी, व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विभागों की प्रयोगशालाओं में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही विश्वकर्मा पूजा को लेकर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। विभिन्न विभागों और प्रयोगशालाओं को पूजा के लिए व्यवस्थित किया गया था। पूजा समिति की ओर से सभी विभागों में धार्मिक अनुष्ठान को सुचारू रूप से संपन्न कराया गया। पूजा के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भगवान विश्वकर्मा से ज्ञान, कौशल, सफलता और संस्थान की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

तकनीकी विभागों की प्रयोगशालाओं में विशेष आयोजन

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर विश्वविद्यालय के तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े विभागों में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी समेत विभिन्न विभागों की प्रयोगशालाओं में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई।

इसके अलावा मास कम्युनिकेशन, नर्सिंग, फार्मेसी, विज्ञान सहित अन्य विभागों में भी पूजा-अर्चना की गई। इन विभागों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।

विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाएं विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में इन स्थानों पर विश्वकर्मा पूजा का आयोजन विद्यार्थियों को तकनीकी संसाधनों और अपने कार्यक्षेत्र के प्रति सम्मान की भावना से जोड़ने का माध्यम बना।

अधिकारियों ने किया विभिन्न विभागों का भ्रमण

पूजा-अर्चना के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विभिन्न विभागों एवं प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। अधिकारियों ने वहां आयोजित पूजा कार्यक्रमों में सहभागिता की और विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का उत्साह बढ़ाया।

इस दौरान विभागाध्यक्षों और शिक्षकों ने अधिकारियों को अपने-अपने विभागों में आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी दी। अधिकारियों ने भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा में शामिल होकर विश्वविद्यालय की प्रगति और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

बड़ी संख्या में विद्यार्थी हुए शामिल

विश्वकर्मा पूजा में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की विशेष भागीदारी रही। तकनीकी और अन्य विभागों के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों एवं विभागीय सदस्यों के साथ पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।

विद्यार्थियों में पूजा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पूजा के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ विद्यार्थियों में अपने विभाग, प्रयोगशाला और तकनीकी संसाधनों के प्रति सम्मान का भाव भी देखने को मिला।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को एक साथ मिलकर आयोजन में सहभागिता करने और अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

पूजा समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

विश्वविद्यालय की पूजा समिति की ओर से विश्वकर्मा पूजा के आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया। विभिन्न विभागों और प्रयोगशालाओं में पूजा की व्यवस्था से लेकर प्रसाद एवं भोग वितरण तक समिति के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

समिति के सदस्यों ने यह सुनिश्चित किया कि सभी विभागों में धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित तरीके से संपन्न हो और विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

पूजा के बाद प्रसाद और भोग का वितरण

विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद पूजा समिति की ओर से प्रसाद एवं भोग वितरण का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर विश्वकर्मा पूजा की खुशियां साझा कीं। प्रसाद वितरण के दौरान भी पूरे परिसर में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा।

कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने दिया श्रम और कौशल का संदेश

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने विश्वकर्मा पूजा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, सृजन और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम, कौशल, रचनात्मकता और उत्कृष्टता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है। विश्वविद्यालय में इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी एवं व्यावहारिक क्षमताओं के प्रति सजग करते हुए ज्ञान और कौशल के महत्व से जोड़ना है।

कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को निरंतर नवाचार और गुणवत्तापूर्ण कार्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं और ऐसे में विद्यार्थियों को अपने कौशल को समय के साथ विकसित करते रहना चाहिए।

कुलपति ने परंपरा और तकनीकी शिक्षा के समन्वय को बताया महत्वपूर्ण

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने भी विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा परंपरा और तकनीकी शिक्षा के बीच समन्वय का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाएं विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अपने कार्यक्षेत्र, उपकरणों और तकनीकी संसाधनों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में मदद करते हैं।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान के साथ कौशल, अनुशासन और नवाचार को भी अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं।

विद्यार्थियों को नवाचार के लिए किया प्रेरित

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। वर्तमान दौर में तकनीकी क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए नए विचारों के साथ काम करना और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाना भी है। प्रयोगशालाओं में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर विद्यार्थी अपने कौशल को मजबूत कर सकते हैं।

शिक्षकों और कर्मचारियों की भी रही सहभागिता

विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न विभागों में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने एक साथ पूजा-अर्चना की।

शिक्षकों ने विद्यार्थियों को विश्वकर्मा पूजा के धार्मिक एवं तकनीकी महत्व के बारे में बताया। वहीं कर्मचारियों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की सहभागिता से कार्यक्रम सामूहिक उत्सव का रूप ले गया।

विश्वविद्यालय की सुख-समृद्धि और प्रगति की कामना

पूजा-अर्चना के दौरान विश्वविद्यालय की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की गई। साथ ही विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के कल्याण की कामना की गई।

भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की गई कि विश्वविद्यालय तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ता रहे और यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने ज्ञान एवं कौशल के माध्यम से समाज और देश के विकास में योगदान दें।

विभिन्न विभागों में दिखी उत्सव की रौनक

विश्वकर्मा पूजा के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में अलग-अलग स्तर पर आयोजन किए गए। पूजा स्थलों पर विद्यार्थियों और शिक्षकों की मौजूदगी से पूरे परिसर में उत्सव की रौनक बनी रही।

तकनीकी विभागों की प्रयोगशालाओं में पूजा के साथ-साथ विद्यार्थियों ने अपने उपकरणों और तकनीकी संसाधनों के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया। वहीं अन्य विभागों में भी कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने पूजा में सहभागिता की।

आस्था के साथ तकनीकी शिक्षा का संदेश

नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वकर्मा पूजा ने धार्मिक आस्था के साथ तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास का संदेश भी दिया। भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और तकनीकी दक्षता का प्रतीक मानते हुए विद्यार्थियों को मेहनत और सृजनशीलता के महत्व से अवगत कराया गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल, अनुशासन और नवाचार जरूरी हैं। विश्वकर्मा पूजा जैसे आयोजन विद्यार्थियों को इन मूल्यों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

ये गणमान्य रहे मौजूद

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, अकादमिक एडवाइजर प्रो. दिलीप शोम, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार, डीन एकेडमिक अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

उत्साह और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ आयोजन

विश्वकर्मा पूजा का पूरा कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। पूजा-अर्चना, अधिकारियों के विभाग भ्रमण, प्रसाद एवं भोग वितरण में विश्वविद्यालय परिवार के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के दौरान आस्था के साथ तकनीकी शिक्षा, कौशल, श्रम और नवाचार के महत्व पर भी जोर दिया गया। अंत में विश्वविद्यालय परिवार ने भगवान विश्वकर्मा से सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखने तथा संस्थान को शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ाने की प्रार्थना की।