चक्रधरपुर: प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता के प्रतीक Karam परब को लेकर रविवार को चक्रधरपुर में कुड़मी समाज की ओर से भव्य Karam जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा निकाली गई। पोटका उलीडीह मोड़ से शुरू हुई यह विशाल शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए आसनतालिया मैदान पहुंची। शोभायात्रा में चक्रधरपुर, बंदगांव और सोनुवा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों के हजारों महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शोभायात्रा के दौरान पूरा चक्रधरपुर शहर करम परब के रंग में रंगा नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोगों ने मांदर, ढोल, नगाड़े और कुड़माली लोकगीतों की धुन पर नृत्य करते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। श्रद्धा, उल्लास और लोक संस्कृति के इस संगम ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

50 से अधिक गांवों के लोग हुए शामिल

करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुंचे। चक्रधरपुर के साथ-साथ बंदगांव और सोनुवा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों के लोगों की भागीदारी रही।

महिलाओं, पुरुषों और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बच्चों ने भी शोभायात्रा में हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधान में सजकर पहुंचे लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया। हजारों लोगों की मौजूदगी से शोभायात्रा ने विशाल जनसमागम का रूप ले लिया।

मांदर ढोल और नगाड़े की थाप पर थिरके लोग

शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण पारंपरिक मांदर, ढोल और नगाड़े रहे। इनकी थाप पर लोग कुड़माली लोकगीतों के साथ नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह लोकनृत्य की प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

पारंपरिक संगीत के साथ डीजे की धुन भी सुनाई देती रही। लोकगीतों और आधुनिक संगीत के मेल से शोभायात्रा का माहौल और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया। बच्चे और युवा भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

पारंपरिक वेशभूषा में दिखी सांस्कृतिक विरासत

शोभायात्रा में शामिल लोगों की पारंपरिक वेशभूषा ने विशेष आकर्षण पैदा किया। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक परिधान में नजर आए। इससे झारखंड की लोक संस्कृति और कुड़मी समाज की परंपराओं की झलक देखने को मिली।

शोभायात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज की पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

पोटका उलीडीह मोड़ से शुरू हुई शोभायात्रा

करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा की शुरुआत पोटका उलीडीह मोड़ से हुई। यहां से शोभायात्रा पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ आगे बढ़ी।

इसके बाद शोभायात्रा पोटका सफेद गिरजा, लाल गिरजा, प्रेम निवास, इतवारी बाजार, कुसुम कुंज, एलआईसी बिल्डिंग और ओवरब्रिज होते हुए आगे बढ़ी।

इसके बाद लोगों का कारवां पवन चौक, भगत सिंह चौक, चेकनाका, प्रखंड कार्यालय और मारवाड़ी स्कूल मार्ग से होते हुए आसनतालिया मैदान पहुंचा।

पवन चौक पर अतिथियों का हुआ सम्मान

शोभायात्रा के दौरान पवन चौक स्थित मुख्य मंच पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों, समाजसेवियों और अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

आयोजकों की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया और करम परब के महत्व को लेकर चर्चा की गई। सम्मान समारोह के दौरान सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

जगह-जगह पेयजल और शरबत की व्यवस्था

हजारों लोगों के शोभायात्रा में शामिल होने को देखते हुए रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से पेयजल और शरबत की व्यवस्था की गई थी।

शोभायात्रा के मार्ग में लोगों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभागियों का स्वागत किया। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का अभिनंदन किया गया। स्थानीय लोगों के स्वागत से शोभायात्रा में शामिल लोगों का उत्साह और बढ़ गया।

Karam परब ने दिया एकता और भाईचारे का संदेश

करम जाऊआ शोभायात्रा के माध्यम से सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला। अलग-अलग गांवों से आए लोग एक साथ शोभायात्रा में शामिल हुए और सामूहिक रूप से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया।

आयोजकों के अनुसार, करम परब प्रकृति और संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ सामूहिकता की भावना को भी मजबूत करता है।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना मुख्य उद्देश्य

आयोजकों ने बताया कि करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा का प्रमुख उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है।

आयोजकों का कहना है कि आधुनिक समय में युवा पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से परिचित कराना जरूरी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को पारंपरिक गीत, संगीत, नृत्य, वेशभूषा और सामाजिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है।

सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर जोर

शोभायात्रा के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से होती है। इसलिए इन परंपराओं को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा में लोकगीत और नृत्य के माध्यम से इसी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

महिलाओं और बच्चों की भी रही बड़ी भागीदारी

शोभायात्रा में महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। महिलाएं पारंपरिक परिधान में शामिल हुईं, वहीं बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

युवाओं ने शोभायात्रा की व्यवस्था और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। इस सामूहिक भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया।

कुड़मी समाज के केंद्रीय नेतृत्व की रही भागीदारी

कार्यक्रम में कुड़मी समाज के केंद्रीय नेतृत्व, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने आयोजन में हिस्सा लेकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।

हजारों लोगों की उपस्थिति ने करम परब के प्रति समाज की आस्था और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव को प्रदर्शित किया।

आयोजक मंडली ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

आयोजन को सफल बनाने में करम जाऊआ बेड़हा आयोजन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अध्यक्ष रोमित केटियार, कार्यकारी अध्यक्ष नीतिश महतो, रवि महतो, वरीय उपाध्यक्ष दुर्योधन महतो, उपाध्यक्ष गणेश महतो, महासचिव दीपक महतो, सचिव सर्वजीत महतो, कोषाध्यक्ष बकलेश महतो और सोशल मीडिया प्रभारी दुर्योधन महतो सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में करण महतो, खिरोद महतो, नरेंद्र महतो, दिलीप कुमार महतो, गौरी शंकर महतो, रतनलाल महतो, जगदीश महतो, उमा शंकर महतो, डॉक्टर महतो, कैलाश चंद्र महतो, बलराज हिंदवार, प्रदीप महतो, प्रताप केटियार, नकुल चंद्र महतो, दिनेश महतो, कालीपद महतो, भजनलाल महतो, मनसाराम महतो, शिवलाल महतो, प्रदीप कुमार महतो, करन महतो, पूर्ण चंद्र महतो, नारायण महतो, विनोद महतो, अनिल महतो, धर्म सिंह महतो, बाणेश्वर महतो, राजेंद्र महतो, जातेन महतो, कौशल प्रकाश महतो, राजेश महतो, संजय महतो, विशेश्वर महतो, कमलेश महतो, शिवचरण महतो, सतिन महतो, संतोष महतो, मृत्युंजय महतो, अर्जित महतो, पहलवान महतो, अघनु महतो, अमित महतो, विजय महतो, शुक्रा महतो, सूरज महतो, राजेश महतो सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

Karam परब की सांस्कृतिक विरासत को मिला मंच

करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा ने चक्रधरपुर में झारखंड की लोक संस्कृति और करम परब की परंपरा को एक व्यापक मंच प्रदान किया। हजारों लोगों की भागीदारी, पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा ने आयोजन को खास बना दिया।

आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रखे जाएंगे, ताकि समाज की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे और युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं से जुड़ी रहे।

उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ आयोजन

पोटका उलीडीह मोड़ से शुरू होकर आसनतालिया मैदान तक पहुंची यह विशाल शोभायात्रा पूरे रास्ते उत्साह और उल्लास से भरी रही। जगह-जगह हुए स्वागत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया।

हजारों लोगों की उपस्थिति के बीच आयोजित करम जाऊआ बेड़हा शोभायात्रा ने सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया। करम परब के अवसर पर चक्रधरपुर में आयोजित यह विशाल आयोजन स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा।