नई दिल्ली: बाजार में पनीर के नाम पर बिकने वाले गैर-दूध आधारित उत्पादों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें दूध से प्राप्त अवयवों से नहीं बने उत्पादों को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। आधिकारिक FSSAI रिकॉर्ड के अनुसार यह ड्राफ्ट 24 सितंबर 2026 को जारी हुआ है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। FSSAI पहले से ही ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी के उत्पादों के लिए अलग लेबलिंग से जुड़े प्रावधानों पर काम करता रहा है। अब पनीर के नाम के इस्तेमाल को लेकर नियमों को और स्पष्ट करने का प्रस्ताव सामने आया है।

क्या है FSSAI का नया प्रस्ताव?

FSSAI के ड्राफ्ट के मुताबिक, ऐसे उत्पाद जो दूध से प्राप्त अवयवों से नहीं बने हैं, उन्हें अपने नाम, लेबल, पैकेजिंग या मार्केटिंग में ‘Paneer’ यानी पनीर शब्द का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।

इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी उत्पाद को बनाने में दूध या दूध से प्राप्त अवयवों के बजाय अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और वह केवल देखने या इस्तेमाल में पनीर जैसा है, तो उसे सामान्य पनीर के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा।

FSSAI के इस प्रस्ताव का संबंध विशेष रूप से उन उत्पादों से है जिन्हें डेयरी उत्पादों के विकल्प या डेयरी एनालॉग के रूप में बाजार में बेचा जाता है।

एनालॉग पनीर क्या होता है?

डेयरी एनालॉग ऐसे उत्पाद होते हैं जिन्हें किसी डेयरी उत्पाद के समान दिखने, बनावट या उपयोग के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन उनके निर्माण में दूध के बजाय अन्य सामग्री का इस्तेमाल हो सकता है।

ऐसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री उत्पाद के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इनमें वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

FSSAI के नियमों में ‘Analogue in Dairy Context’ के लिए पहले से प्रावधान मौजूद हैं। FSSAI ने 2025 में इस श्रेणी के उत्पादों की स्पष्ट पहचान और लेबलिंग को लेकर परामर्श प्रक्रिया भी शुरू की थी।

उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने पर जोर

FSSAI के इस प्रस्ताव के पीछे प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाना है। यदि कोई गैर-दूध आधारित उत्पाद सामान्य पनीर के नाम से बाजार में प्रस्तुत किया जाता है, तो उपभोक्ता उसके वास्तविक स्वरूप और सामग्री को लेकर भ्रमित हो सकता है।

इसी कारण नियामक संस्था उत्पाद की पहचान को स्पष्ट रखने पर जोर दे रही है। उपभोक्ता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वह जिस उत्पाद को खरीद रहा है, वह वास्तविक डेयरी उत्पाद है या उसका गैर-डेयरी विकल्प।

FSSAI की ओर से पहले भी डेयरी एनालॉग की अलग पहचान और स्पष्ट लेबलिंग को लेकर दिशा-निर्देश और परामर्श जारी किए जा चुके हैं।

60 दिनों में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां

यह ध्यान रखना जरूरी है कि 24 सितंबर 2026 को जारी दस्तावेज ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। यानी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

FSSAI ने संबंधित हितधारकों से इस ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। आधिकारिक नोटिफिकेशन में इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से टिप्पणियां मांगी गई हैं। FSSAI की वेबसाइट पर इस ड्राफ्ट के साथ टिप्पणियां और सुझाव देने का प्रारूप भी उपलब्ध कराया गया है।

इसका मतलब है कि अंतिम नियम लागू होने से पहले संबंधित उद्योग, कारोबारी संस्थाएं और अन्य हितधारक प्रस्ताव पर अपनी राय दे सकते हैं।

पहले से मौजूद ‘Analogue in Dairy Context’ उत्पादों पर भी असर

प्रस्ताव का प्रभाव उन उत्पादों पर भी पड़ सकता है जो पहले से ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के तहत बाजार में मौजूद हैं।

FSSAI की ओर से इस श्रेणी को लेकर पहले भी स्पष्ट किया गया है कि डेयरी एनालॉग को डेयरी उत्पाद के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। 2025 के परामर्श पत्र में भी FSSAI ने ऐसे उत्पादों की स्पष्ट पहचान और लेबलिंग को लेकर सुझाव मांगे थे।

नए ड्राफ्ट का उद्देश्य इस अंतर को और स्पष्ट करना है, ताकि डेयरी उत्पाद और उनके गैर-डेयरी विकल्पों की पहचान अलग-अलग बनी रहे।

रेस्तरां और होटल के लिए भी पहले जारी हो चुके हैं निर्देश

यह मामला केवल पैकेज्ड उत्पादों तक सीमित नहीं है। FSSAI के पश्चिमी क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में चीज एनालॉग के इस्तेमाल और उसके नाम को लेकर अलग सार्वजनिक नोटिस जारी किया था।

इसमें कहा गया था कि चीज एनालॉग को ‘पनीर’ के रूप में बेचना कानून का उल्लंघन है। केंद्रीय लाइसेंस वाले फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को भी निर्देश दिया गया था कि वे खरीद और किचन टीम को इस बारे में प्रशिक्षित करें और जहां चीज एनालॉग का इस्तेमाल हो, वहां उसकी वास्तविक प्रकृति को मेन्यू या डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट किया जाए।

इससे स्पष्ट है कि FSSAI डेयरी एनालॉग और वास्तविक डेयरी उत्पादों के बीच अंतर को उपभोक्ताओं के सामने स्पष्ट रखने पर लगातार जोर दे रहा है।

पनीर के नाम से जुड़े दावों पर सख्ती

FSSAI के नए ड्राफ्ट को बाजार में पनीर के नाम और पहचान को लेकर सख्ती बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी गैर-दूध आधारित उत्पाद को केवल उसकी समानता के आधार पर पनीर के नाम से बाजार में पेश न किया जाए।

इससे उपभोक्ता को खरीदारी के समय उत्पाद की प्रकृति को समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही डेयरी उत्पादों और उनके विकल्पों के बीच लेबलिंग को लेकर स्पष्टता बढ़ने की संभावना है।

नकली पनीर और डेयरी एनालॉग में अंतर समझना जरूरी

बाजार में ‘नकली पनीर’ और ‘डेयरी एनालॉग’ शब्द कई बार एक-दूसरे के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन नियामकीय दृष्टि से दोनों को एक ही मान लेना सही नहीं है।

हर गैर-पारंपरिक पनीर जैसा उत्पाद जरूरी नहीं कि अवैध हो। यदि किसी उत्पाद का निर्माण और बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार होती है और उसकी पहचान तथा लेबलिंग स्पष्ट है, तो वह अलग श्रेणी में बाजार में उपलब्ध हो सकता है।

FSSAI की चिंता मुख्य रूप से उस स्थिति से जुड़ी है जिसमें गैर-दूध आधारित उत्पाद को उपभोक्ता के सामने वास्तविक डेयरी उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

पहले भी FSSAI ने डेयरी एनालॉग को लेकर मांगे थे सुझाव

FSSAI ने अप्रैल 2025 में ‘Analogue in Dairy Context’ से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन पर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। उस परामर्श प्रक्रिया में रेस्तरां और फूड सर्विस प्रतिष्ठानों के मेन्यू पर ‘Non-dairy’ या ‘Analogue’ जैसे शब्दों से उत्पाद की प्रकृति स्पष्ट करने और डेयरी एनालॉग की ढीली बिक्री पर रोक जैसे सुझाव भी रखे गए थे।

इससे पता चलता है कि डेयरी एनालॉग उत्पादों की पहचान और उपभोक्ता सूचना को लेकर नियामकीय प्रक्रिया पहले से चल रही है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

यदि मौजूदा ड्राफ्ट प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्पाद की नाम और लेबलिंग में स्पष्टता से जुड़ा होगा।

गैर-दूध आधारित उत्पाद को पनीर के नाम से पहचानना कठिन होगा और कंपनियों को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के अनुरूप नाम एवं लेबलिंग करनी होगी। इससे खरीदारी के समय उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे डेयरी पनीर खरीद रहे हैं या किसी अन्य सामग्री से बना विकल्प।

अभी अंतिम नियम लागू नहीं हुआ

FSSAI के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे फिलहाल Draft Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसलिए इस समय इसे अंतिम लागू नियम के रूप में देखना सही नहीं होगा।

ड्राफ्ट पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार किए जाने के बाद ही अंतिम नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित प्रावधान किस अंतिम रूप में लागू किए जाते हैं।

गैर-दूध आधारित उत्पादों को ‘पनीर’ नाम से बाजार में पेश किए जाने को लेकर FSSAI ने 24 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है। प्रस्ताव में ऐसे उत्पादों के नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने की दिशा में प्रावधान रखा गया है।

FSSAI का उद्देश्य डेयरी उत्पादों और उनके गैर-डेयरी विकल्पों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना तथा उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना है। फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्ट चरण में है और इस पर हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इसके प्रावधान बाध्यकारी होंगे।