नई दिल्ली: देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर करोड़ों यूजर्स के लिए राहत की खबर है। नए Merchant Discount Rate यानी MDR फ्रेमवर्क को लेकर लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब UPI से पेमेंट करने पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। आम यूजर्स के लिए UPI से पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा पहले की तरह निःशुल्क रहेगी।

नए फ्रेमवर्क के तहत कुछ निर्धारित मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू होगा। हालांकि इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाला जाना है। सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजेक्शन प्रभावित नहीं होंगे।

ऐसे में UPI इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में कोई शुल्क नहीं देना होगा और MDR आखिर किस पर लागू होगा।

1. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना रहेगा फ्री

UPI के जरिए अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को पैसे भेजते हैं तो यह Person-to-Person यानी P2P ट्रांजेक्शन कहलाता है।

नए फ्रेमवर्क में सभी P2P ट्रांजेक्शन को पूरी तरह फ्री रखा गया है। यानी ट्रांजेक्शन की रकम कितनी भी हो, व्यक्ति से व्यक्ति को UPI के माध्यम से पैसे भेजने पर ग्राहक से कोई MDR, प्लेटफॉर्म फीस या अन्य ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा।

इसी तरह किसी व्यक्ति से UPI के जरिए पैसे प्राप्त करने पर भी ग्राहक को MDR नहीं देना होगा।

2. ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं

अगर आप किसी दुकान, रेस्टोरेंट या दूसरे कारोबारी को UPI से ₹2,000 तक का भुगतान करते हैं तो इस तरह के P2M ट्रांजेक्शन पर MDR नहीं लगेगा।

इसका सीधा मतलब है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले ग्राहकों को नए MDR ढांचे की वजह से अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹2,000 तक के P2M भुगतान फ्री रहेंगे। यही वजह है कि UPI के बड़ी संख्या में छोटे ट्रांजेक्शन नए नियम से प्रभावित नहीं होंगे।

3. छोटे दुकानदारों के लिए भी जारी रहेगा जीरो MDR

नए नियमों में छोटे व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। P2PM कैटेगरी में आने वाले छोटे व्यापारी, स्ट्रीट वेंडर और मोहल्ले की दुकानों को जीरो MDR का लाभ मिलता रहेगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार, जो छोटे व्यापारी UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, वे निर्धारित P2PM श्रेणी के तहत जीरो MDR व्यवस्था में बने रहेंगे।

इससे छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट स्वीकार करना आसान बना रहेगा।

4. UPI से पैसे प्राप्त करने पर नहीं लगेगा चार्ज

अगर कोई व्यक्ति आपके बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजता है तो पैसे प्राप्त करने के लिए आपको अलग से MDR या ट्रांजेक्शन फीस नहीं देनी होगी।

यानी परिवार के सदस्य से पैसे लेना हो, किसी दोस्त से भुगतान लेना हो या किसी व्यक्ति से UPI के जरिए रकम प्राप्त करनी हो, इस तरह के P2P ट्रांजेक्शन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

यह नियम UPI के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले व्यक्तिगत लेन-देन के लिए महत्वपूर्ण है।

5. जरूरी सेवाओं में ₹2,000 तक के भुगतान

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि से जुड़े कुछ जरूरी क्षेत्रों को भी नए MDR ढांचे में अलग तरीके से रखा गया है।

इन क्षेत्रों में ₹2,000 तक के पात्र UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। हालांकि ₹2,000 से अधिक के कुछ पात्र ट्रांजेक्शन पर अलग MDR व्यवस्था लागू हो सकती है। सरकार ने ऐसे आवश्यक क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से ऊपर के लेन-देन पर निर्धारित फ्लैट MDR का प्रावधान किया है।

इसलिए बड़े भुगतान करते समय संबंधित कैटेगरी के नियमों को समझना जरूरी होगा।

6. ग्राहक से MDR के नाम पर अलग फीस नहीं ली जाएगी

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात MDR को लेकर है। MDR यानी Merchant Discount Rate ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क नहीं है।

यह पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स आदि के बीच निर्धारित तरीके से वितरित होने वाला शुल्क है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से UPI के जरिए पैसे भेजने या प्राप्त करने के लिए अलग ट्रांजेक्शन फीस, प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ चार्ज नहीं लिया जाना चाहिए।

7. ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR

नए नियमों के तहत ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट P2M ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार ₹75,000 और उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए MDR को प्रति ट्रांजेक्शन ₹300 तक सीमित किया गया है। यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को पेमेंट करते समय 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त देना होगा।

MDR और ग्राहक शुल्क में क्या अंतर है?

MDR को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात पर है। आम भाषा में समझें तो MDR एक ऐसा शुल्क है जो मर्चेंट पेमेंट के पेमेंट इकोसिस्टम से संबंधित है। इसे सीधे ग्राहक से वसूलने वाला चार्ज नहीं माना गया है।

सरकार ने साफ किया है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क। इसका इस्तेमाल पेमेंट इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार से जुड़े प्रतिभागियों के बीच किया जाता है।

इसलिए UPI यूजर्स को हर बार पेमेंट करते समय MDR जोड़कर भुगतान करने की जरूरत नहीं है।

96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजेक्शन रहेंगे अप्रभावित

सरकार के मुताबिक नए फ्रेमवर्क के बाद भी लगभग 96 प्रतिशत P2M ट्रांजेक्शन अप्रभावित रहेंगे। इनमें ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के ट्रांजेक्शन शामिल हैं।

इसका मतलब है कि UPI से होने वाले ज्यादातर सामान्य मर्चेंट भुगतान में ग्राहकों के लिए अतिरिक्त शुल्क की स्थिति नहीं बनेगी।

UPI यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

सामान्य UPI यूजर के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले भुगतान पहले की तरह फ्री रहेंगे। छोटी खरीदारी और ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा।

वहीं बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन के लिए नया MDR ढांचा लागू होगा, लेकिन सरकार के मुताबिक इसे ग्राहकों पर अलग से फीस के रूप में नहीं डाला जाना चाहिए।

UPI इस्तेमाल करने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

UPI से पेमेंट करते समय अगर कोई मर्चेंट MDR के नाम पर ग्राहक से अतिरिक्त रकम मांगता है तो यूजर को पेमेंट की रसीद और ट्रांजेक्शन विवरण संभालकर रखना चाहिए।

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि मर्चेंट MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

UPI यूजर्स के लिए नए MDR नियमों का मतलब यह नहीं है कि अब हर डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगेगा। P2P ट्रांजेक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे, ₹2,000 तक के P2M भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और निर्धारित श्रेणी के छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

MDR मुख्य रूप से निर्धारित बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन से संबंधित है और सरकार के अनुसार इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इसलिए आम UPI यूजर रोजमर्रा के भुगतान पहले की तरह कर सकता है।