पश्चिमी सिंहभूम: जिले के उपायुक्त Manish Kumar ने मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दौरान बरंगा पंचायत का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बरंगा पंचायत स्थित वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां रह रहे वृद्धजनों से आत्मीय मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। उपायुक्त ने वृद्धजनों के साथ काफी समय बिताया तथा उनके स्वास्थ्य, दैनिक जीवन, रहन-सहन और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
वृद्धाश्रम में उपायुक्त के पहुंचने पर वहां रह रहे बुजुर्गों में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। उपायुक्त ने प्रत्येक वृद्धजन से व्यक्तिगत रूप से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने वृद्धाश्रम में मिल रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली और संबंधित कर्मियों से व्यवस्थाओं की स्थिति जानी।
वृद्धजनों को भेंट किए वस्त्र
इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने वृद्धजनों को वस्त्र भी भेंट किए। अपने बीच जिले के उपायुक्त को देखकर बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी और अपनापन साफ दिखाई दिया। मुलाकात के दौरान एक वृद्धजन ने गीत के माध्यम से उपायुक्त का स्वागत किया, जिससे माहौल और भी भावुक एवं आत्मीय हो गया।

उपायुक्त ने वृद्धजनों से बातचीत के दौरान उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को भी समझा। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का ऐसा पड़ाव है, जहां व्यक्ति को विशेष रूप से सम्मान, स्नेह और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता होती है। समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि बुजुर्गों को किसी प्रकार की उपेक्षा का सामना न करना पड़े।
“आप स्वयं को कभी अकेला न समझें”
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने वृद्धजनों के साथ सहज एवं स्नेहपूर्ण संवाद करते हुए कहा कि वे समाज और परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि उम्र का यह पड़ाव सम्मान, अपनापन और सुरक्षित वातावरण का हकदार है। वृद्धजनों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं को कभी अकेला न समझें।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन वृद्धजनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील है और उनकी हर संभव सहायता एवं सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का स्नेह और आशीर्वाद समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उपायुक्त ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, रहने की व्यवस्था, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने संबंधित कर्मियों को निर्देश दिया कि वृद्धजनों की सुविधा और गरिमापूर्ण जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
वृद्धजनों की सेवा सामाजिक जिम्मेदारी
उपायुक्त ने कहा कि वृद्धजनों की सेवा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का विषय भी है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन समाज की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता के साथ काम किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की आवश्यकताओं पर लगातार नजर रखने तथा किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसका प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
प्रोजेक्ट प्राण के तहत सुदृढ़ पंचायत सचिवालय का शुभारंभ
वृद्धाश्रम के दौरे के बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने बरंगा पंचायत सचिवालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने “प्रोजेक्ट प्राण” के तहत पंचायत सचिवालय के सुदृढ़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिए की गई व्यवस्थाओं का विस्तार से अवलोकन किया।
स्थानीय मुखिया एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी की मौजूदगी में उपायुक्त ने दीप प्रज्वलित कर सुदृढ़ एवं सुसज्जित बरंगा पंचायत सचिवालय का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पंचायत सचिवालय में विकसित की गई विभिन्न सुविधाओं का भी निरीक्षण किया गया।
पंचायत सचिवालय में विकसित की गईं कई सुविधाएं
“प्रोजेक्ट प्राण” के तहत पंचायत सचिवालय को ग्रामीणों के लिए अधिक उपयोगी, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इनमें मंईयां कक्ष, ऊर्जा कक्षा, ज्ञान केंद्र सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं।
उपायुक्त ने इन सभी सुविधाओं का जायजा लिया और उनके संचालन एवं उपयोगिता के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवालय का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीणों की जरूरतों से जुड़ा एक प्रभावी सेवा केंद्र बनाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों को प्रखंड और जिला मुख्यालय के चक्कर से मिले राहत
उपायुक्त Manish कुमार ने कहा कि पंचायत सचिवालय ग्रामीण क्षेत्र में शासन और आम जनता के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे इस प्रकार विकसित किया जाना चाहिए कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, सेवाओं और आवश्यक सूचनाओं के लिए अनावश्यक रूप से प्रखंड या जिला मुख्यालय का चक्कर न लगाना पड़े।
उन्होंने उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत स्तर पर ही अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं से संबंधित जानकारी ग्रामीणों को उपलब्ध हो, ताकि लोगों का समय और संसाधन दोनों बच सकें।
मंईयां कक्ष, ऊर्जा कक्षा और ज्ञान केंद्र को क्रियाशील रखने का निर्देश
उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि पंचायत सचिवालय में उपलब्ध मंईयां कक्ष, ऊर्जा कक्षा और ज्ञान केंद्र सहित सभी सुविधाओं को नियमित रूप से क्रियाशील रखा जाए।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी ग्रामीणों तक पहुंचेगा, जब उनका नियमित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे स्थानीय लोगों को इन सुविधाओं की जानकारी दें और अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।
पात्र लाभुकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर
उपायुक्त ने पंचायत स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
ऐसे में पंचायत सचिवालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। पंचायत स्तर पर योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, पात्र लाभुकों की पहचान करने और उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जानी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और आवेदन से लेकर लाभ मिलने तक की प्रक्रिया में ग्रामीणों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
पंचायत सचिवालय बने सेवा, सुविधा और संवाद का केंद्र
उपायुक्त मनीष कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों से कहा कि पंचायत सचिवालय को केवल एक कार्यालय के रूप में न देखा जाए। इसे ग्रामीणों के लिए सेवा, सुविधा, जानकारी और संवाद का केंद्र बनाने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर प्रशासन और जनता के बीच बेहतर संवाद से विकास कार्यों को गति मिलती है। ग्रामीणों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर समझकर उनका समाधान करने में पंचायत सचिवालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विकास कार्यों में जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर
उपायुक्त ने पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का स्थायी विकास केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे ग्रामीणों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय जरूरतों एवं प्राथमिकताओं को ध्यान में रखें। इससे योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से आम जनता तक पहुंचाया जा सकेगा।
प्रशासनिक संवेदनशीलता और ग्रामीण विकास का संदेश
बरंगा पंचायत के दौरे के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार की वृद्धजनों से आत्मीय मुलाकात और पंचायत सचिवालय के सुदृढ़ीकरण का निरीक्षण प्रशासन की दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को सामने लाता है—वृद्धजनों के प्रति संवेदनशीलता और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रशासनिक सुविधाओं का विस्तार।
एक ओर जहां वृद्धाश्रम में उपायुक्त ने बुजुर्गों के साथ समय बिताकर उनकी समस्याओं को समझा, वहीं दूसरी ओर पंचायत सचिवालय में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण कर उन्हें प्रभावी रूप से ग्रामीणों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे अपने दायित्वों का संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य योजनाओं और सुविधाओं को केवल कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचाना है।
बरंगा पंचायत का यह दौरा वृद्धजनों के प्रति सम्मान, प्रशासनिक संवेदनशीलता और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।




















